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लोकसभा चुनाव

अमित शाह से मिलने पहुंचे CM योगी, सरकार गठन के बाद पहली मुलाकात से हलचल तेज

देश में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद रविवार को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस समारोह में उनके साथ 30 कैबिनेट मंत्रियों, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की.

Updated on: 10 Jun 2024, 11:31 AM

highlights

  • अमित शाह से मिलने पहुंचे CM योगी
  • सरकार गठन के बाद पहली मुलाकात से हलचल तेज
  • यूपी में बीजेपी को हुआ है बड़ा नुकसान 

 

New Delhi:

Narendra Modi Cabinet Meeting 3.0: देश में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद रविवार को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस समारोह में उनके साथ 30 कैबिनेट मंत्रियों, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की. इस बीच, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोमवार (10 जून 2024) को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. सीएम योगी आदित्यनाथ ने अमित शाह को एक बार फिर केंद्र में मंत्री बनने पर बधाई दी. वहीं, दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक सोमवार शाम (5 बजे) को लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर होने की संभावना है.

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अब ऐसे में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. संभावना जताई जा रही है कि दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव नतीजों को लेकर चर्चा हो सकती है. इसके अलावा कयास लगाए जा रहे हैं कि अगला अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर भी अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच चर्चा होने की संभावना है.

BJP का कौन होगा अध्यक्ष?

वहीं आपको बता दें कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन होगा, क्योंकि पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे यह सवाल उठता है कि भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा. इस बदलाव के बीच उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजे भी काफी महत्वपूर्ण रहे.

यूपी में किसे कितनी सीटें मिली?

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से इस बार समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ी सफलता मिली, जहां पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पार्टी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की. भाजपा को 33 सीटों पर संतोष करना पड़ा. कांग्रेस, जिसने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था उसको 6 सीटों पर सफलता मिली.

वहीं साल 2014 के बाद यह पहली बार हुआ है कि भाजपा बहुमत के जादुई आंकड़े 272 को पार नहीं कर पाई. इस कारण, भाजपा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों पर निर्भरता बढ़ गई है. यह स्थिति पार्टी के लिए नई चुनौतियां और संभावनाएं दोनों प्रस्तुत करती है. अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व में क्या बदलाव होते हैं और भाजपा अपनी रणनीति किस तरह से पुनर्परिभाषित करती है.