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मणिकर्णिका घाट Photograph: (X)
उत्तर प्रदेश सरकार ने मणिकर्णिका घाट के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें जारी की हैं. इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि घाट का प्लेटफॉर्म पहले से कहीं अधिक बड़ा और सुव्यवस्थित होगा, ताकि अंतिम संस्कार के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो. सरकार का उद्देश्य इस महाश्मशान को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करना है, जबकि उसकी धार्मिक गरिमा को बनाए रखने का भी दावा किया जा रहा है.
लोगों को होती हैं परेशानियां
वर्तमान में मणिकर्णिका घाट तक पहुंचना बेहद कठिन है. तंग गलियों, अव्यवस्थित रास्तों और जर्जर मूलभूत सुविधाओं के कारण यहां आने वाले लोगों को भारी परेशानी होती है. दाह संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाएं भी लंबे समय से बदहाल स्थिति में थीं. बरसात के मौसम में तो दाह संस्कार करने में भी काफी दिक्कतें होती हैं. ऐसे में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से सटे इस घाट के कायाकल्प की जरूरत महसूस की जा रही थी.
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पहले चरण में 35 करोड़ रुपये आवंटित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को अपने विजन काशी में शामिल किया था. पहले चरण के लिए 35 करोड़ रुपये की राशि पहले ही आवंटित की जा चुकी है. सरकार का कहना है कि नया स्वरूप न केवल सुविधाजनक होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काशी की छवि को और मजबूत करेगा.
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सीएम योगी ने क्या कहा?
शनिवार को वाराणसी दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि सच्चाई इससे अलग है. मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी को आज नई वैश्विक पहचान मिली है और विकास के कार्य उसी सोच के तहत हो रहे हैं.
काशी को बदनाम करने की जो साजिश हो रही है, उसका पर्दाफाश होना चाहिए... pic.twitter.com/diDpzktSMX
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 17, 2026
विपक्ष का तीखा विरोध
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कॉरिडोर के नाम पर काशी की विरासत को नुकसान पहुंचाया गया है और कई प्राचीन मंदिरों को तोड़ा गया है. वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मणिकर्णिका घाट पर हुए विध्वंस को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है. उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी स्मृतियों का भी जिक्र किया.
बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुल्डोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) January 15, 2026
विकास के नाम पर, चंद लोगों… pic.twitter.com/HM4Rt4di1u
आस्था, विरासत और विकास की बहस
मणिकर्णिका घाट को लेकर यह बहस केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है. यह आस्था, परंपरा और आधुनिक विकास के संतुलन का सवाल बन गई है. जहां सरकार इसे जरूरी सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक समूह इसे काशी की पहचान से खिलवाड़ मान रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और मणिकर्णिका घाट किस रूप में सामने आता है.
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