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कानपुर में लेम्बोर्गिनी हादसे में शिवम मिश्रा गिरफ्तार Photograph: (ANI/Social Media)
Kanpur Lamborghini Case: कानपुर पुलिस ने गुरुवार को तंबाकू व्यापारी के.के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आर्य नगर निवासी शिवम मिश्रा को रविवार (8 फरवरी, 2026) दोपहर वीआईपी रोड पर हुई लैम्बोर्गिनी दुर्घटना के मामले में गिरफ्तार किया था. हालांकि बाद में शिवम दुबे को ​जमानत मिल गई है. 20 हजार के मुचलके पर उसे रिहाई दी गई है. न्यायिक हिरासत को लेकर पुलिस की अर्जी को कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
इस दुर्घटना में तीन लोग घायल हुए थे. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया. वहीं कारोबारी के.के. मिश्रा ने बेटे को बचाने के लिए दावा किया था कि उनका बेटा दिल्ली में इलाज करा रहा है, लेकिन पुलिस ने उसे गुरुवार सुबह कानपुर से ही गिरफ्तार कर लिया.
बेटे को बचाने की हर कोशिश हुई नाकाम
बता दें कि हादसे के बाद बुधवार को ड्राइवर ने सरेंडर करने के लिए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सेवन की अदालत में आवेदन किया था, लेकिन कोर्ट ने उस आवेदन को खारिज कर दिया. शिवम मिश्रा के वकील द्वारा दायर एक आवेदन में दावा किया गया कि घटना वाले दिन कार शिवम के ड्राइवर मोहन एम गाड़ी चला रहे थे. जो दिल्ली के द्वारका के रहने वाले हैं. अदालत में प्रस्तुत पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि मोहन इस मामले में आरोपी नहीं हैं.
अब तक की जांच से पता चला है कि दुर्घटना वाले दिन कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था. बेटे शिवम मिश्रा को बचाने के लिए परिवार ने झूठी कहानी बनाई को कहा कि हादसे के बाद शिवम का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. जबकि पुलिस ने शिवम मिश्रा को गुरुवार को कानपुर से ही गिरफ्तार किया.
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— News Nation (@NewsNationTV) February 12, 2026
कोर्ट ने खारिज किया ड्राइवर का सरेंडर आवेदन
शिवम के ड्राइवर मोहन की ओर से हादसे की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, उनके वकील ने अदालत में शिकायतकर्ता मोहम्मद तौफीक और मोहन के बीच 8 फरवरी को हुए एक समझौते को भी प्रस्तुत किया. इसमें कहा गया है कि दोनों के बीच एक समझौता हुआ था. मोहन ने चिकित्सा उपचार का खर्च वहन किया, जिससे मोहम्मद तौफीक संतुष्ट हो गए और आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते थे.
समझौते में यह भी कहा गया था कि यह बिना किसी दबाव के किया गया था. हालांकि पीड़ित पक्ष ने तर्क दिया कि क्योंकि मोहन का नाम इस मामले में नहीं है इसलिए उसके आत्मसमर्पण की कोई जरूरत नहीं है. दोनों पक्षों की बात सुनने और पुलिस रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद अदालत ने मोहन का आत्मसमर्पण आवेदन खारिज कर दिया.
अदालत ने मांगी कार की टेक्निकल जांच रिपोर्ट
वहीं लैंबोर्गिनी कार को पुलिस पुलिस स्टेशन वापस लेने के लिए भी शिवम मिश्रा के वकील ने कोर्ट में एक आवेदन किया है. जिसे लेकर अदालत ने पुलिस से तकनीकी जांच रिपोर्ट मांगी है. पुलिस ने बताया कि आरटीओ द्वारा कार की तकनीकी जांच की जाएगी, जिस पर अदालत ने कार मालिक को जांच अधिकारी को वाहन के दस्तावेज दिखाने का आदेश दिया और पुलिस को तकनीकी जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
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