नोएडा इंजीनियर मौत मामले में जांच हुई तेज, अब SIT टीम पहुंची नोएडा अथॉरिटी

Noida Engineer Death Case: नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) नोएडा प्राधिकरण पहुंची

Noida Engineer Death Case: नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) नोएडा प्राधिकरण पहुंची

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Dheeraj Sharma
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Nodia Engineer Yuvraj Death

Noida Engineer Death Case: नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) नोएडा प्राधिकरण पहुंची, जहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण दफ्तर के भीतर आम लोगों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है, ताकि जांच प्रक्रिया बिना किसी व्यवधान के पूरी हो सके.

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प्राधिकरण के अधिकारियों से हो रही पूछताछ

SIT की टीम नोएडा प्राधिकरण के उन अधिकारियों से सवाल-जवाब कर रही है, जिनकी जिम्मेदारी स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट और घटनास्थल से जुड़ी व्यवस्थाओं से थी. जांच का फोकस इस बात पर है कि गहरे गड्ढे में पानी भरने की जानकारी पहले से थी या नहीं, और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया. प्राधिकरण की ओर से दी गई अनुमतियों और फाइलों की भी बारीकी से जांच की जा रही है.

SDRF टीम से भी मांगा गया जवाब

जांच के तहत उस SDRF टीम को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है, जो 16 जनवरी की रात युवराज को बचाने के प्रयास में लगी थी. SIT यह जानना चाहती है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी क्यों हुई और किन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी. रेस्क्यू के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और उपलब्ध संसाधनों की भी समीक्षा की जा रही है.

पुलिस और फायर विभाग से सवाल

इसके अलावा नॉलेज पार्क थाना प्रभारी (SHO), संबंधित ACP और मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) को भी SIT के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया है. इन अधिकारियों से घटना की सूचना मिलने का समय, मौके पर पहुंचने में हुई देरी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर जवाब मांगे जा रहे हैं.

जिम्मेदारी तय करने की तैयारी

SIT की जांच का उद्देश्य सिर्फ हादसे के कारणों को उजागर करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की भूमिका तय करना भी है. माना जा रहा है कि बयान दर्ज होने और दस्तावेजों की जांच के बाद जल्द ही कार्रवाई की दिशा साफ हो सकती है. युवराज की मौत के इस मामले में लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है. 

बता दें कि इस मामले में 5 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें जिम्मेदार बिल्डर भी शामिल हैं और उनके सपोर्टर भी. इसके अलावा एसआईटी को 5 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने की डेडलाइन भी अब खत्म होने वाली है. इस केस में योगी सरकार लगातार एक्शन मोड में ही नजर आ रही है. माना जा रहा है कि जल्द जिम्मेदारों को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा. 

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