Ghaziabad Suicide Case: कोरियन दोस्तों की गुत्थी में उलझी पुलिस, बेचे गए मोबाइल से खुल सकता है राज

Ghaziabad Suicide Case: तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के मामले में पुलिस को कोरियन कनेक्शन की तलाश है. बेचे गए मोबाइल फोन से सच्चाई सामने आने की उम्मीद.

Ghaziabad Suicide Case: तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के मामले में पुलिस को कोरियन कनेक्शन की तलाश है. बेचे गए मोबाइल फोन से सच्चाई सामने आने की उम्मीद.

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Yashodhan Sharma
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Ghaziabad Suicide Case: गाजियाबाद आत्महत्या मामले में पुलिस को घटनास्थल से आठ पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है. इसमें लिखा है कि तीनों किशोरियां अपनी सबसे छोटी बहन देबू की कोरियन दोस्तों से बात करवाती थीं. इसी बात के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन बहनों ने कोरियन दोस्त बनाए कैसे और वे किस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए उनसे बात करती थीं.

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इसलिए पुलिस ढूंढ़ रही मोबाइल

हालांकि, शुरुआती जांच में पुलिस को बच्चियों की मां के मोबाइल फोन से कोई भी कोरियन ऐप, गेम या ऑनलाइन टास्क गेम नहीं मिला है. साइबर टीम ने फोन की जांच की, लेकिन उसमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे कोरियन कनेक्शन की पुष्टि हो सके. इसी वजह से पुलिस अब उन दो मोबाइल फोन को ढूंढने में लगी है, जिन्हें पहले बच्चियों से छीनकर बेच दिया गया था. पुलिस को उम्मीद है कि इन्हीं मोबाइल फोन से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है.

मां के मोबाइल को फॉरेंसिक लैब भेजा

बताया गया है कि तीनों बहनों ने जिस कमरे की खिड़की से छलांग लगाकर आत्महत्या की, वहीं फॉरेंसिक टीम को उनकी मां का मोबाइल फोन मिला था. इस फोन को अब फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा ताकि गहराई से जांच की जा सके.

IMEI नंबर के जरिए ट्रेस करने की कोशिश

जांच में यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले पिता चेतन कुमार ने निशिका और प्राची को एक-एक मोबाइल फोन दिलवाया था. लेकिन बाद में एक फोन तीन महीने पहले और दूसरा फोन करीब 10 दिन पहले उनसे छीनकर बेच दिया गया था. अब पुलिस इन दोनों फोन के आईएमईआई नंबर के जरिए उन्हें ट्रेस करने की कोशिश कर रही है.

स्कूल जाना कर दिया था बंद

पिता चेतन कुमार का कहना है कि भले ही पुलिस को अभी तक कोई ऑनलाइन टास्क गेम नहीं मिला हो, लेकिन उनकी बेटियां पिछले तीन साल से ऐसे गेम खेल रही थीं. वे कोरिया जाने की जिद भी करती थीं, जिसे लेकर उन्हें कई बार समझाया गया. चेतन ने यह भी बताया कि उनकी बेटियां स्कूल जाना बंद कर चुकी थीं क्योंकि पहले फेल होने के कारण वे शर्म महसूस करती थीं.

14 साल की प्राची बताती थी खुद को लीडर

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें हमेशा एक साथ रहती थीं. 14 साल की प्राची को परिवार वाले लीडर मानते थे. वही तय करती थी कि तीनों को क्या करना है. तीनों का स्वभाव जिद्दी था और वे हर काम जैसे कि खाना, नहाना या रोजमर्रा के काम एक साथ करती थीं.

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