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आनंद विहार से बिहार की ओर जा रही लिच्छवी एक्सप्रेस (14006) में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सेकंड एसी कोच के एक पहिये में अचानक आग लग गई. घटना गाजियाबाद के हरनंदी नदी पुल के पास की है, जहां गश्त कर रहे दो पुलिसकर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया.
कांस्टेबलों की चौकसी से मिली समय पर सूचना
आरपीएफ कांस्टेबल राजवीर और कमल नियमित गश्त पर थे, तभी उनकी नजर एक कोच के पहिये से उठती लपटों पर पड़ी. आग थर्ड एसी सेकंड कोच के पहिये के पास दिखाई दी, जो गार्ड कोच के समीप था। दोनों जवानों ने तुरंत गार्ड को सूचित किया और कंट्रोल रूम को खबर दी.
सूचना मिलते ही ट्रेन को शाम 6:35 बजे गाजियाबाद स्टेशन के आउटर ट्रैक पर रोक दिया गया. आरपीएफ इंस्पेक्टर चेतन प्रकाश और उनकी टीम अग्निशमन उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची.
यात्रियों में दहशत, लेकिन कोई हताहत नहीं
जैसे ही ट्रेन की रफ्तार कम हुई और धुआं दिखाई देने लगा, कुछ यात्री घबरा गए. डर के चलते कुछ लोगों ने कोच से उतरने की कोशिश भी की. हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी यात्री को चोट नहीं आई। प्रभावित कोच से यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और स्थिति को नियंत्रण में लिया गया.
आग बुझाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रेन को प्लेटफॉर्म नंबर एक या दो पर लाया गया, जहां तकनीकी टीम ने विस्तृत जांच शुरू की।
तकनीकी खराबी बनी आग की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कोच की बाइंडिंग टूटने और ब्रेक शू के फंस जाने के कारण पहिये में अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ, जिससे आग भड़क उठी. रेलवे की टेक्निकल टीम ने फंसे हुए ब्रेक शू को ठीक किया और आवश्यक मरम्मत की.
सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद आइसोलेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया. इसके बाद शाम 7:07 बजे ट्रेन को सुरक्षित रूप से रवाना कर दिया गया.
संचालन पर नहीं पड़ा असर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस घटना से किसी अन्य ट्रेन के संचालन पर प्रभाव नहीं पड़ा. समय रहते आग पर काबू पा लेने से संभावित बड़ा हादसा टल गया. यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
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