नोएडा इंजीनियर युवराज मौत केस में आया बड़ा अपडेट, पोस्टमार्टम में हुआ बड़ा खुलासा

Nodia Engineer Death: युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से नोएडा स्थित घर लौट रहे थे. रात के समय घना कोहरा छाया हुआ था और सड़क पर न तो पर्याप्त लाइटिंग थी और न ही किसी तरह के चेतावनी बोर्ड लगे हुए थे.

Nodia Engineer Death: युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से नोएडा स्थित घर लौट रहे थे. रात के समय घना कोहरा छाया हुआ था और सड़क पर न तो पर्याप्त लाइटिंग थी और न ही किसी तरह के चेतावनी बोर्ड लगे हुए थे.

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Dheeraj Sharma
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Noida Engineer Death

Nodia Engineer Death: नोएडा में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक युवराज की मौत Asphyxiation (दम घुटने) के कारण हुई है. इसके साथ ही पोस्टमार्टम में हार्ट फेलियर भी दर्ज किया गया है. इस खुलासे के बाद परिजनों का गुस्सा और दर्द और गहरा हो गया है.

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कैसे हुआ हादसा, निर्माणाधीन मॉल बना मौत का कारण

यह हादसा उस वक्त हुआ जब युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से नोएडा स्थित घर लौट रहे थे. रात के समय घना कोहरा छाया हुआ था और सड़क पर न तो पर्याप्त लाइटिंग थी और न ही किसी तरह के चेतावनी बोर्ड लगे हुए थे. इसी लापरवाही के चलते उनकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के खुले बेसमेंट में जा गिरी, जहां भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था.

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह बेसमेंट बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुला था, जिससे यह हादसा हुआ. मामले में पुलिस ने दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

छत पर बैठकर पिता को किया था आखिरी फोन

हादसे के बाद युवराज ने हार नहीं मानी। वह किसी तरह अपनी कार की छत पर चढ़ गए और वहीं से अपने पिता को फोन किया. उन्होंने मदद की गुहार लगाते हुए कहा, 'पापा, प्लीज बचा लो.'

पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. दमकल विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. युवराज फ्लैश लाइट जलाकर मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन अंधेरा, कोहरा और प्रशासनिक देरी उनकी जान नहीं बचा सकी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई लापरवाही की गंभीरता

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार युवराज की मौत पानी में डूबने से दम घुटने के कारण हुई. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अत्यधिक तनाव और ऑक्सीजन की कमी के कारण हार्ट फेलियर हुआ. यह साफ संकेत करता है कि यदि समय पर रेस्क्यू होता, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी.

इकलौते बेटे की मौत से टूटा परिवार

युवराज अपने परिवार के इकलौते बेटे थे. पिता, चाचा और दादी का रो-रोकर बुरा हाल है. पिता हाथ जोड़कर प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि ऐसी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े.

परिवार का कहना है कि युवराज एक जिम्मेदार और शांत स्वभाव का युवक था, जो कभी तेज रफ्तार में गाड़ी नहीं चलाता था. यह हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही से हुई मौत है.

प्रशासन पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर शहरी विकास, निर्माण स्थलों की सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या युवराज को इंसाफ मिल पाता है.

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