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PM मोदी ने अयोध्या में किया राम मंदिर भूमि पूजन, दक्षिणा में पंडित जी को दिया ये दान

इस अवसर पर पीएम मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे, ये सभी लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने को लेकर काफी खुश नजर आ रहे थे.

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 05 Aug 2020, 04:25:56 PM
pm modi worship

पीएम मोदी हवन करते हुए (Photo Credit: फाइल )

नई दिल्‍ली:

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर के लिए आधार शिला रखी. पीएम मोदी ने हनुमानगढ़ी में पहले भगवान हनुमान और फिर भगवान राम के दर्शन किए इसके बाद उन्होंने भूमि पूजन अनुष्ठान किया. इस अवसर पर पीएम मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे, ये सभी लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने को लेकर काफी खुश नजर आ रहे थे.

भूमिपूजन के बाद जब दक्षिणा की बारी आई तो ऐतिहासिक राममंदिर का भूमि पूजन करवाने वाले पंडित जी ने बताया कि, किसी भी यज्ञ में दक्षिणा आवश्यक होती है, और ऐसे जजमान कहां मिलेंगे हम लोगों को. उन्होंने बताया कि यज्ञ की पत्नी का नाम दक्षिणा है, यज्ञ रूपी पुरुष और दक्षिणा रूपी पत्नी के संयोग से एक पुत्र की उत्पत्ति होती है, जिसका नाम है फल है. पंडित जी ने आगे बताया कि हमें इस काम के लिए इतनी दक्षिणा मिल गई है कि अरबों आशीर्वाद प्राप्त होंगे. पीएम मोदी ने राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखने के बाद राम जन्मभूमि परिसर में पारिजात का पौधा लगाया. 

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लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं
कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं. पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को ये फूल चढ़ाने से वो प्रसन्न होती हैं. खास बात ये है कि पूजा-पाठ में पारिजात के वे ही फूल इस्तेमाल किए जाते हैं जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं. पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है. एक मान्यता ये भी है कि 14 साल के वनवास के दौरान सीता माता हर‍सिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार करती थीं.

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जानें मान्यता
आज से हजारों वर्ष पूर्व द्वापर युग में स्वर्ग से देवी सत्यभामा के लिए भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा धरती पर लाए गए पारिजात वृक्ष की कथा प्रचलित है. यह देव वृक्ष समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था. 14 रत्नों में यह एक विशिष्ट रत्न रहा है. सौभाग्य और हर्ष की बात यह है कि यह वृक्ष कुशभवनपुर (सुलतानपुर) की पावन धरती पर गोमती नदी के तट पर स्थित अतीत की अनोखी कहानी सुना रहा है. यह भी कहा जाता था कि इस पेड़ को छूने मात्र से इंद्रलोक की अपसरा उर्वशी की थकान मिट जाती थी. पारिजात धाम आस्था का केंद्र है. सावन माह में यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है. महाशिवरात्रि व्रत पर यहां कई जिलों से श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचते हैं.

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First Published : 05 Aug 2020, 04:05:24 PM

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