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साध्वी प्रेम बाईसा Photograph: (File)
Sadhvi Prem Baisa Death Case: राजस्थान के जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच अब विशेष जांच टीम (SIT) करेगी. जोधपुर के पुलिस कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है. जिसमें तीन सदस्य शामिल होंगे. इस टीम की अगुवाई एसीपी छवि शर्मा करेंगी. उनके साथ बोरनाडा थाने के इंचार्ज शकील अहमद को भी जांच टीम में शामिल किया गया है.
फॉरेंसिक एक्सपर्ट को भी किया गया जांच टीम में शामिल
इस विशेष जांच टीम में वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर जांच के लिए एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट को भी शामिल किया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े हर पहलू की सच्चाई एसआईटी आने वाले दिनों में सबके सामने लेकर आएगी. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और गहराई से की जाएगी. साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
जानें कैसे हुई साध्वी प्रेम बाईसा की मौत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साध्वी प्रेम बाईसा 27 जनवरी (मंगलवार) को अजमेर में आयोजित एक कथा कार्यक्रम को पूरा करने के बाद जोधपुर के आरती नगर स्थित अपने आश्रम लौटी थीं. आश्रम लौटने के बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी. उसके बाद कंपाउंडर ने तुरंत उन्हें एक इंजेक्शन लगाया. लेकिन उससे उन्हें राहत नहीं और बल्कि उनकी तबियत और बिगड़ गई.
पैतृक गांव में दी गई समाधि
उसके बाद उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया. जहां उन्होंन दम तोड़ दिया. परिजनों के अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने साध्वी प्रेम बाईसा का शव का पोस्टमार्टम कराया. साथ ही विसरा और सैंपल जांच के लिए भेज दिए. उसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया. 28 जनवरी (बुधवार) को उनके पार्थिव शरीर को जोधपुर से उनके पैतृक गांव परेऊ लाया गया. वहीं शुक्रवार को उनकी समाधि संस्कार पूरा किया गया.
12 साल की उम्र में चुनी थी अध्यात्म की राह
कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का शुक्रवार (30 जनवरी, 2026) को बालोतरा जिले के पैतृक गांव परेऊ में विधि-विधान समाधि संस्कार कर दिया गया. साध्वी प्रेम बाईसा के निधन से उनके पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है. बता दें कि साध्वी प्रेम बाईसा ने सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में धर्म और आध्यात्म की राह अपना ली थी. लेकिन 25 वर्ष की उम्र में उनका असामयिक निधन हो गया. उनकी मौत के बाद पूरे जोधपुर में हड़कंप मच गया. साध्वी प्रेम बाईसा के निधन के बाद भारी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय लोग दर्शन करने के लिए पहुंचने लगे.
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