Rajasthan News: सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसर अब भगाएंगे कुत्ते, कोटा के कलेक्टर ने सौंपी जिम्मेदारी

Rajasthan News: कोटा के सरकारी कॉलेजों में अब पढ़ाई के साथ-साथ प्रोफेसरों को कैंपस से आवारा कुत्तों को दूर रखने की जिम्मेदारी दी गई है. जिला कलेक्टर के आदेश से शिक्षक असमंजस में हैं और कॉलेजों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं.

Rajasthan News: कोटा के सरकारी कॉलेजों में अब पढ़ाई के साथ-साथ प्रोफेसरों को कैंपस से आवारा कुत्तों को दूर रखने की जिम्मेदारी दी गई है. जिला कलेक्टर के आदेश से शिक्षक असमंजस में हैं और कॉलेजों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं.

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Deepak Kumar
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stray dogs Photograph: (AI)

Rajasthan News:राजस्थान के कोटा जिले में सरकारी कॉलेजों को “डॉग फ्री” बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक अनोखा आदेश जारी किया है. इस आदेश के तहत अब कॉलेजों में पढ़ाने वाले प्रोफेसरों को ही कॉलेज परिसर से आवारा कुत्तों को दूर रखने की जिम्मेदारी दी गई है. जिला कलेक्टर द्वारा जारी इस आदेश के बाद कॉलेजों के शिक्षकों के बीच हैरानी और चर्चा का माहौल है.

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कोटा के कलेक्टर का आदेश

बता दें कि जिला कलेक्टर ने एक समीक्षा बैठक के बाद सभी सरकारी कॉलेजों को निर्देश दिया कि वे अपने परिसरों को पूरी तरह कुत्तामुक्त बनाएं. इसके लिए कॉलेज के ही प्रोफेसरों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. आदेश में साफ कहा गया है कि अगर कॉलेज परिसर में कहीं भी कुत्ता नजर आता है, तो इसके लिए संबंधित नोडल अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा.

मुख्य गेट पर लगेंगे नाम और नंबर

कलेक्टर के आदेश के अनुसार, जिन प्रोफेसरों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, उनके नाम और मोबाइल नंबर कॉलेज के मुख्य गेट पर बोर्ड पर लिखे जाएंगे. यही नोडल अधिकारी कुत्तों को कॉलेज परिसर में आने से रोकने के साथ-साथ सफाई और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी भी करेंगे.

प्रोफेसरों में असमंजस

आदेश सामने आने के बाद कई प्रोफेसर असमंजस में हैं. उनका कहना है कि उनकी मुख्य जिम्मेदारी छात्रों को पढ़ाना है, न कि कुत्तों को भगाना. हालांकि, प्रशासन का मानना है कि छात्रों की सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण के लिए यह कदम जरूरी है. कलेक्टर ने साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में साफ निर्देश दिए हैं कि हर कॉलेज तुरंत नोडल अधिकारी नियुक्त कर इसकी जानकारी प्रशासन को दे.

नोडल अधिकारी बनने से बच रहे सीनियर प्रोफेसर

बताया जा रहा है कि सीनियर प्रोफेसर इस जिम्मेदारी को लेने से बच रहे हैं. ऐसे में कई कॉलेजों में आपसी सहमति से नए असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रयोगशाला स्टाफ और क्लर्क को नोडल अधिकारी बनाया गया है. कुछ कॉलेजों में अभी यह प्रक्रिया जारी है.

चार कॉलेजों में हो चुकी है नियुक्ति

जानकारी के मुताबिक, अब तक चार सरकारी कॉलेजों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है. इनमें राजकीय विज्ञान कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हर्ष खंडेलवाल, राजकीय कॉमर्स कन्या कॉलेज में सहायक आचार्य अर्चना अग्रवाल, राजकीय आर्ट्स कॉलेज में प्रयोगशाला सहायक विकास राव और राजकीय कॉमर्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप कुमार को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जा रही है और इसका उद्देश्य कॉलेज परिसरों में सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना है.

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