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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा Photograph: (ani)
चंडीगढ़ में आज पंजाब के वित्त और आबकारी मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने पंजाब की वित्तीय स्थिति को लेकर जो आंकड़े पेश किए हैं, वे काफी हैरान करने वाले और राज्य की तरक्की की गवाही देने वाले हैं. चीमा ने बताया कि 'आम आदमी पार्टी' (आप) के शासन में पंजाब अब राजस्व (कमाई) के विकास में देश के सबसे बेहतरीन तीन राज्यों में शामिल हो गया है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव किसी जादू से नहीं, बल्कि सही मैनेजमेंट, ईमानदारी और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की वजह से आया है.
टैक्स से होने वाली कमाई में जबरदस्त उछाल
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि पंजाब की अपनी टैक्स से होने वाली कमाई में बहुत बड़ी बढ़ोतरी हुई है. साल 2021-22 में जब 'आप' सरकार ने जिम्मेदारी संभाली थी, तब राज्य की टैक्स से कुल कमाई 37,327 करोड़ रुपये थी. लेकिन अब 2024-25 के आंकड़ों को देखें, तो यह बढ़कर 57,919 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. यह दिखाता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था न केवल पटरी पर लौटी है, बल्कि अब यह तेज़ी से दौड़ भी रही है. मंत्री ने साफ किया कि टैक्स का यह पैसा अब सीधे राज्य के विकास में लगाया जा रहा है?
शराब से होने वाली कमाई ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड
आबकारी यानी शराब से होने वाली कमाई को लेकर मंत्री ने पिछली सरकारों पर कड़ा निशाना साधा. उन्होंने बताया कि सिर्फ चार सालों के भीतर ही शराब से होने वाले राजस्व में करीब 86.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. अगर हम पुराने आंकड़ों की तुलना करें, तो अकाली-भाजपा सरकार के पांच सालों में कुल कमाई 20,545 करोड़ रुपये थी, जबकि कांग्रेस सरकार ने पांच सालों में 27,395 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे. इसके मुकाबले, 'आप' सरकार ने जनवरी 2026 तक ही 37,975 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कर दिए हैं, जो पिछले सभी रिकॉर्ड्स से कहीं ज़्यादा है.
जीएसटी (GST) कलेक्शन में भी मारी बाजी
जीएसटी के मोर्चे पर भी पंजाब ने शानदार प्रदर्शन किया है. हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय जीएसटी की सालाना औसत कमाई 12,257 करोड़ रुपये के करीब थी. 'आप' सरकार के आने के बाद यह औसत बढ़कर अब 21,845 करोड़ रुपये सालाना हो गई है. खास बात यह है कि केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद और मुआवजे में कमी आने के बावजूद, राज्य ने अपने दम पर जीएसटी कलेक्शन में 70.50 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की है. यह पंजाब के व्यापारियों और सरकार के बीच बढ़ते भरोसे को दिखाता है.
जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्रियों से खूब मिला पैसा
ज़मीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त यानी स्टांप ड्यूटी से होने वाली कमाई के मामले में भी पंजाब ने नया मील का पत्थर छुआ है. मंत्री ने बताया कि पिछले चार सालों में सरकार को इस मद से 19,515 करोड़ रुपये मिले हैं. यह आंकड़ा पिछली सरकारों के पांच साल के कार्यकाल से भी 60 फीसदी ज़्यादा है. चीमा ने उम्मीद जताई कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, 2026-27 के अंत तक यह कमाई पिछली सरकारों के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी. यह बढ़त दिखाती है कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आने से लोगों का भरोसा बढ़ा है.
विकास के कामों पर खर्च करने में नहीं छोड़ी कोई कसर
सरकार की प्राथमिकता सिर्फ पैसा इकट्ठा करना ही नहीं, बल्कि उसे जनता के काम पर खर्च करना भी है. वित्त मंत्री ने बताया कि विकास कार्यों (कैपिटल एक्सपेंडिचर) पर खर्च के मामले में उनकी सरकार ने पिछली सरकारों को पीछे छोड़ दिया है. जहां अकाली-भाजपा ने पांच सालों में 14,641 करोड़ और कांग्रेस ने 19,356 करोड़ खर्च किए थे, वहीं 'आप' सरकार विकास के प्रोजेक्ट्स पर 31,630 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है. यह पैसा स्कूल, अस्पताल और सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में लगाया जा रहा है.
विरासत में मिले भारी कर्ज का बोझ
पंजाब की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि उन्हें विरासत में करीब 3,00,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज मिला है. इस पुराने कर्ज की वजह से सरकार पर बहुत दबाव रहता है. उन्होंने बताया कि सरकार जो नया कर्ज लेती है, उसका 35 फीसदी हिस्सा तो सिर्फ पुरानी सरकारों के छोड़े हुए बिलों और देनदारियों को चुकाने में चला जाता है. इसके अलावा 50 फीसदी हिस्सा पुराने कर्जों के ब्याज भरने में खर्च हो जाता है. यानी विकास के लिए सरकार के पास उधार लिए गए पैसों का सिर्फ 15 फीसदी हिस्सा ही बच पाता है.
कर्ज के अनुपात को कम करने में मिली सफलता
इन मुश्किलों के बावजूद, पंजाब सरकार ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. मंत्री ने दावा किया कि राज्य के कर्ज और कुल घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात को 48.25 प्रतिशत से घटाकर 44.47 प्रतिशत कर दिया गया है. यह आर्थिक मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसका मतलब है कि पंजाब की कमाई के मुकाबले कर्ज का बोझ धीरे-धीरे कम हो रहा है. इसके साथ ही, सरकार ने वेतन आयोग (Pay Commission) के पुराने बकाए को चुकाने के लिए भी करीब 14,191 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जो पिछली सरकारों ने अधूरा छोड़ दिया था.
भविष्य के संकट से निपटने के लिए बनाया 'बचत फंड'
पंजाब सरकार ने भविष्य में आने वाली किसी भी आर्थिक चुनौती से निपटने के लिए भी खास तैयारी की है. मंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में रखे जाने वाले खास फंड्स (कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड और गारंटी रिडेम्पशन फंड) में सरकार ने बड़ा निवेश किया है. मार्च 2022 तक इस फंड में सिर्फ 3,027 करोड़ रुपये थे, लेकिन अब यह बढ़कर 11,720 करोड़ रुपये हो गए हैं. यह करीब 287 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो राज्य को अचानक आने वाले किसी भी वित्तीय संकट से बचाने में 'ढाल' का काम करेगी.
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