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पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल Photograph: (X)
पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से आम आदमी पार्टी सरकार ने ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है. पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस चरण का औपचारिक आगाज किया. नई दिल्ली और पंजाब से जुड़े इस कार्यक्रम में सरकार ने स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से लड़ी जाएगी.
10 से 25 जनवरी तक गांव-गांव पदयात्रा
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि अभियान का पहला चरण सफल रहा, जिसके बाद अब दूसरे चरण में 10 से 25 जनवरी तक पंजाब के 15,000 गांवों और वार्डों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी. इसका उद्देश्य हर गली, हर पिंड और हर वार्ड तक नशे के खिलाफ संदेश पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि इस बार जनता खुद इस अभियान की अगुवाई करेगी.
विलेज डिफेंस कमेटी और मोबाइल एप
केजरीवाल ने जानकारी दी कि दूसरे चरण में विलेज डिफेंस कमेटियों का गठन किया गया है, जिनसे अब तक लगभग डेढ़ लाख स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं. इन स्वयंसेवकों को ‘पिंडां दे पहरेदार’ नाम दिया गया है. नशा तस्करी से जुड़ी सूचनाएं देने के लिए एक मोबाइल एप लॉन्च किया गया है, जिसमें जानकारी देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. इसके अलावा 9899100002 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर भी लोग अभियान से जुड़ सकते हैं.
नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के पहले चरण में अब तक 28,000 से अधिक एनडीपीएस केस दर्ज किए गए और करीब 42,000 तस्करों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से 350 बड़े तस्कर शामिल हैं. उन्होंने दावा किया कि 88 प्रतिशत मामलों में दोषसिद्धि हुई है, जो यह साबित करती है कि कार्रवाई ठोस और कानूनी है. नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई है.
ड्रोन के जरिए आने वाले नशे पर लगाम
केजरीवाल ने बताया कि पंजाब में सबसे अधिक नशा पाकिस्तान सीमा के जरिए ड्रोन से आता है. केंद्र सरकार की सीमित व्यवस्था के बावजूद पंजाब सरकार ने अपने संसाधनों से एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदे हैं. अब सीमा पर ड्रोन गतिविधियों को तुरंत पकड़कर नशे की खेप को नष्ट किया जा रहा है.
नशा पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास पर जोर
अभियान का दूसरा अहम पहलू नशा पीड़ितों का इलाज और पुनर्वास है. केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने डि-एडिक्शन और पुनर्वास केंद्रों की हालत सुधारी है. बेड की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है और सभी सुविधाएं मुफ्त हैं. विलेज डिफेंस कमेटियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे गांवों में नशा करने वाले युवाओं को इलाज के लिए प्रेरित करें.
भगवंत मान बोले- यह सामाजिक लड़ाई है
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ का दूसरा चरण एक सामाजिक आंदोलन है. नशा केवल पुलिस कार्रवाई से खत्म नहीं होगा, इसके लिए समाज को आगे आना होगा. उन्होंने अपील की कि नशा करने वालों को अपराधी नहीं, बल्कि मरीज समझा जाए और उन्हें इलाज की मुख्यधारा में लाया जाए.
विपक्ष पर निशाना और भविष्य का भरोसा
भगवंत मान ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए नशा तस्करों को संरक्षण दिया. उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना सिफारिश 61,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार किए हैं. अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि दूसरे चरण के लक्ष्य पहले चरण से भी कम समय में हासिल किए जाएंगे और पंजाब को नशा मुक्त बनाकर ‘रंगला पंजाब’ का सपना पूरा होगा.
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