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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चौहान Photograph: (X)
महाराष्ट्र के 29 महानगर पालिका में 15 जनवरी को होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने ठाकरे बंधुओं पर आज जोरदार हमला बोला है. शिवसेना यूबीटी पर निशाना साधते हुए महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने उद्धव ठाकरे को संयुक्त महाराष्ट्र के शहीदों की याद दिला दी. रविंद्र चव्हाण ने मुंबई में महापालिका चुनाव प्रचार के समापन अवसर पर कहा की संयुक्त महाराष्ट्र के लिए 105 शहीदों ने जिस संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी, उन आंदोलनकर्ताओं पर गोलियां चलाने का कलंक कांग्रेस के नाम दर्ज है और यह इतिहास की निर्विवाद सच्चाई है.
यूबीटी ने बालासाहेब की विरासत को भूलकर कांग्रेस से हाथ मिलाया
रविन्द्र चौहान ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए बताया की 16 जनवरी 1956 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा मुंबई को केंद्रशासित करने की घोषणा ने मराठी अस्मिता को झकझोर दिया था. उसी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए बालासाहेब ठाकरे ने मराठी माणूस के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए शिवसेना की स्थापना की थी.
लेकिन आज UBT गुट के नेता बालासाहेब की उसी विरासत को भूलकर कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए हैं और यह सच्चाई जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलनकारियों पर गोली चलाने वाली केंद्र और राज्य दोनों सरकार कांग्रेस की थी. रविन्द्र चव्हाण ने शिवसेना यूबीटी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा की आज यूबीटी और उनके नेता जिस तरह से कांग्रेस की गोद में बैठकर मराठी अस्मिता का झंडा उठाने का दावा कर रहे हैं ये बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से खुला समझौता करने जैसा है.
कांग्रेस की बैसाखी के सहारे उद्धव बने मुख्यमंत्री
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि 1990 के दशक में कोंकण में रेलवे आई, लेकिन उस समय कांग्रेस सत्ता में नहीं थी. मधु दंडवते और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे दूरदर्शी नेताओं के प्रयासों से कोंकण रेलवे शुरू हुई. 2014 के बाद कोंकण रेलवे के कई स्टेशनों और आसपास के इलाकों में जो विकास हुआ और जिस तरह से ये आधुनिक और सुसज्जित बने, यह सब बीजेपी सरकार में हुआ. शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस दोनों पर एक साथ हमला करते हुए रवींद्र चव्हाण ने कहा की कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए कोंकण के लिए कोई काम नही हुआ लेकिन उन्हीं कोंकण के लोगों के समर्थन से और कांग्रेस की बैसाखियों के सहारे उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की थी.
बाक़ी दलों में ग़ैर मराठियों को नहीं दिखता भविष्य, इसलिए बीजेपी के साथ
सिर्फ़ उबाठा ही नही राज ठाकरे और उनकी पार्टी मनसे भी बीजेपी के निशाने पर आ गई. रवीन्द्र चव्हाण ने एक सवाल का जवाब देते हुए पूछा की आख़िर उबाठा सेना और मनसे बाकी दलों से ज़्यादा मराठी के हितैषी कैसे हो गए? क्या किसी ने इसका ईमानदारी से उत्तर खोजने का प्रयास किया है? चव्हाण ने कहा कि महाराष्ट्र का कोई भी गैर मराठी बीजेपी के साथ इसलिए खड़ा है क्योंकि बाक़ी दलों में उन्हें नेतृत्व, विचारधारा और भविष्य नहीं दिखाई देता. एक और प्रश्न का उत्तर देते हुए रविंद्र चव्हाण ने स्पष्ट किया कि मुंबई की BDD चाली में रहने वाले मराठी भाइयों को उनका हक़ का घर केवल देवेंद्र फडणवीस की सरकार की पहल से ही मिल सका है.
चुनाव आते ही ठाकरे साहब को मराठी माणूस याद आता है, वरना पांच साल तक वे ‘मराठी’ शब्द भी भूल जाते हैं. चव्हाण ने ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा की जब महापालिका के ठेके देने होते हैं तब उद्धव ठाकरे को परप्रांतीय ठेकेदार ही चाहिए होते हैं, और पिछले 30 वर्षों में उन्होंने मुंबई के मराठी माणूस के लिए वास्तव में क्या किया, इसका जवाब उद्धव ठाकरे सार्वजनिक रूप से बताने का साहस करें.
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