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एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन से महायुति के लिए बड़ा झटका लगा है. बुधवार को महाराष्ट्र के बाराम​ती में हुए प्लेन क्रैश में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई. यह सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए बड़ा संकट माना जा रहा है. इससे उबरना आसान नहीं होगा. महाराष्ट्र में मौजूदा महायुति सरकार 2022 में बनी थी. इसमें एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़कर उद्धव ठाकरे की सरकार को गिरा दिया था. इसके बाद वे खुद मुख्यमंत्री बने. वहीं इसी के एक साल बाद अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की एनसीपी को तोड़ दिया था. वे महायुति में शामिल हो गए.
शिंदे को डिप्टी सीएम के पद से संतुष्ट रहना पड़ा
2022 में शिंदे जब सीएम बने तब भाजपा के देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार डिप्टी सीएम थे. इसके बाद 2024 तक यह व्यवस्था जारी रही. मगर विधानसभा चुनावों के बाद हालात बदल गए. 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 288 में से 132 सीटों को जीतकर बड़ी पार्टी बनी.
शिंदे गुट की शिवसेना को 57 और अजित पवार की एनसीपी को 41 सीटें मिली थीं. विपक्ष में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को मात्र 20 सीटें हासिल हुई थीं. इसे महायुति के लिए बड़ी जीत के तौर पर देखा गया. रिजल्ट के बाद एकनाथ शिंदे ने दोबारा सीएम बने रहने की डिमांड रखी. उनका तर्क था कि सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज के कारण ही महायुति को विजय हासिल हुई है.
मगर भाजपा इस पर तैयार नहीं हुई. शिंदे को डिप्टी सीएम के पद से संतुष्ट रहना पड़ा. इसका बड़ा कारण था कि भाजपा और अजित पवार की एनसीपी मिलकर अपने दम पर सरकार बनाने में सक्षम थी. मगर शिंदे और अजित पवार एक-दूसरे के खिलाफ संतुलन बना रहे थे. इस तरह से किसी एक सहयोगी का अधिक दबाव गठबंधन पर नहीं बन सका.
महायुति में बढ़ सकता है टकराव
इसके के बाद स्थानीय निकाय चुनाव सामने आए. इसमें महायुति के अंदर काफी टकराव देखा गया. कई जगह पर सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हुए. एक दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे. मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में भाजपा और शिंदे गुट साथ आए. मगर अजित पवार की एनसीपी को अलग थलग कर दिया गया. इससे अजित पवार काफी नाराज हो गए. उनकी शरद पवार गुट के संग नजदीकियां बढ़ीं. पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ पहले से एनसीपी का गढ़ थे. यहां पर दोनों पवार गुटों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया.
एनसीपी के भविष्य पर उठे सवाल
अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी का भविष्य क्या होने वाला है? विधानसभा और नगर निगम चुनावों में अजित पवार गुट ने शरद पवार के गुट के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया. इसके बाद खुद को असली एनसीपी के रूप में बताया. अगर दोनों एनसीपी को विलय हो जाता है तो नेतृत्व को लेकर संघर्ष बढ़ेगा. शरद पवार बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को आगे लाना चाहते हैं. ये अजित पवार गुट के कई नेताओं को मंजूर नहीं होगा. अजित पवार गुट में सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और सुनेत्रा पवार जैसे नेताओं को बड़ा दावेदार माना गया है. अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का राजनीति में कोई जनाधार नहीं है. ऐसे में पार्टी के अंदर संघर्ष बढ़ सकता है.
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