महाराष्ट्र में कुछ ही घंटे टिक सका कांग्रेस-BJP का गठबंधन, CM फडणवीस भी थे नाराज

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन टूट गया. जब गठबंधन की खबर सामने आई थी तो पार्टियों की किरकरी हो रही थी. अब कांग्रेस ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं.

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन टूट गया. जब गठबंधन की खबर सामने आई थी तो पार्टियों की किरकरी हो रही थी. अब कांग्रेस ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं.

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Mohit Saxena
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CM फडणवीस

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन कुछ समय के बाद टूट गया. गठबंधन की खबर सामने आने के बाद ही पार्टियों की किरकरी शुरू हो गई थी. अब कांग्रेस ने अपने कदम को पीछे खींच लिया है. वहीं दूसरी तरफ सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पर नाराजगी जताई थी. आपको बता दें कि अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे की पार्टी को हराने के लिए दोनों दल साथ आए थे. मगर ये समीकरण धिक नहीं टिक सका. अब कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया. भाजपा के साथ स्थानीय स्तर पर गठबंधन करने को लेकर उन पर कार्रवाई हुई है. 

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सीएम फडणवीस ने लगाई थी फटकार 

कांग्रेस की कार्रवाई से पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन करने के आरोप में भाजपा नेताओं कड़ी आलोचना की. वहीं कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी. उन्होंने साफ कर दिया कि इस तरह के गठबंधन पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की मंजूरी के बिना ही कर लिए गए. इसे संगठनात्मक अनुशान का उल्लंघन बताया जाता है. फडणवीस के अनुसार, वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ किसी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा. अगर किसी स्थानीय नेता ने इस तरह निर्णय अपनी मर्जी लिया है तो यह अनुशासनहीनता दर्शाती है. इसके खिलाफ कार्रवाई होगी.' उन्होंने आगे जानकारी दी कि ऐसे गठबंधन को रद्द करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं. 

क्या है अंबरनाथ नगर परिषद का समीकरण 

अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं. यहां 20 दिसंबर 2025 में चुनाव हुए थे. इसके परिणाम 21 सामने आए थे. एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई. उसने 27 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं बहुमत में मात्र 4 कम है. वहीं अन्य दलों के प्रदर्शन को देखें तो भाजपा (15), कांग्रेस (12), NCP (अजित पवार गुट) (4) को कुल 31 सीटें हासिल की. दूसरी सबसे बड़ी पार्टी  होने के बाद भाजपा ने शिवसेना (शिंदे) को सत्ता से दूर रखने को लेकर कांग्रेस से हा​थ मिला लिया.  इस गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का नाम दिया गया. उसे 31 पार्षदों का समर्थन मिला. 

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