BMC Election Results: नहीं चला 'मराठी मानुस' कार्ड, जानें ठाकरे ब्रदर्स की हार के 6 कारण

BMC Election Results: ठाकरे ब्रदर्स यानी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक मंच पर आए थे. लेकिन उनका जादू इस चुनाव में नहीं चला. जानते हैं उनकी हार के 6 कारण.

BMC Election Results: ठाकरे ब्रदर्स यानी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक मंच पर आए थे. लेकिन उनका जादू इस चुनाव में नहीं चला. जानते हैं उनकी हार के 6 कारण.

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Dheeraj Sharma
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BMC Election 2026 Results Thakeray Brothers

BMC Election Results: महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे अहम माने जाने वाले बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी जीत दर्ज की है. 29 में से 23 नगर निकायों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को स्पष्ट बढ़त हासिल है. मुंबई की सत्ता पर लंबे समय से काबिज रही शिवसेना के लिए यह नतीजे बड़ा झटका माने जा रहे हैं, खासकर तब जब ठाकरे ब्रदर्स यानी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक मंच पर आए थे. लेकिन उनका जादू इस चुनाव में नहीं चला. खास तौर पर राज ठाकरे का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है. मुंबई में तो उनकी पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है. आइए जानते हैं आखिर क्यों चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स पिछड़ गए. क्यों बीएमसी में 4 दशक बाद गैर ठाकरे का राज होगा. 

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राजनीतिक विश्लेषकों और रुझानों के आधार पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (ठाकरे ब्रदर्स) की हार के मुख्य कारण निम्नलिखित माने जा रहे हैं...

1. 'मराठी कार्ड' का बेअसर होना

उद्धव और राज ठाकरे ने इस चुनाव में 'मराठी मानुष' और 'मराठी अस्मिता' के मुद्दे को केंद्र में रखा था. हालांकि, मुंबई की बदलती जनसांख्यिकी (Demographics) और मतदाताओं की प्राथमिकता अब केवल भाषा तक सीमित नहीं रही। विकास और बुनियादी सुविधाओं के सामने भावनात्मक मुद्दा इस बार विफल साबित हुआ.

2. 20 साल बाद का बेमेल गठबंधन

दोनों भाइयों का लगभग दो दशक बाद एक साथ आना मतदाताओं के लिए विश्वसनीय नहीं रहा. आलोचकों का मानना है कि यह गठबंधन "डर" की वजह से था न कि किसी ठोस विजन की वजह से. कार्यकर्ताओं के बीच भी समन्वय की कमी दिखी, क्योंकि वर्षों तक वे एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते आए थे.

3. महायुति का 'विकास' और 'हिंदुत्व' मॉडल

बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (महायुति) ने अपना पूरा कैंपेन 'डबल इंजन सरकार' और विकास कार्यों पर केंद्रित रखा. उन्होंने 'मराठी और हिंदू मेयर' का नैरेटिव सेट किया, जिसने ठाकरे बंधुओं के वोट बैंक में सेंध लगाई. लाडली बहिन जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला वोटरों का महायुति की ओर झुकाव भी एक बड़ा कारण बना.

4. पार्टी का विभाजन और कैडर का बिखराव

एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना में की गई बगावत के बाद, ग्रासरूट लेवल के कई अनुभवी नगरसेवक और शाखा प्रमुख शिंदे गुट में शामिल हो गए थे. उद्धव ठाकरे के पास जमीन पर सक्रिय रहने वाले संगठन की वह पुरानी ताकत नहीं रही, जो पहले हुआ करती थी.

5. गैर-मराठी वोटरों की नाराजगी

राज ठाकरे के पुराने बयानों और उत्तर भारतीयों के प्रति आक्रामक रवैये के कारण मुंबई की एक बड़ी आबादी (विशेषकर उत्तर भारतीय और गुजराती) ठाकरे ब्रदर्स के गठबंधन से दूर रही. बीजेपी ने इस वर्ग को पूरी तरह से अपनी ओर एकजुट करने में सफलता हासिल की.

6. विपक्ष में बिखराव (कांग्रेस का अलग होना)

महाविकास अघाड़ी (MVA) के बजाय उद्धव-राज ने अपना अलग गठबंधन बनाया, जबकि कांग्रेस अलग चुनाव लड़ी. इससे विरोधी मतों का बंटवारा हुआ, जिसका सीधा फायदा बीजेपी-शिंदे गठबंधन को मिला. 

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