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वैश्विक स्तर पर जल, जंगल, जमीन का मुद्दा महत्वपूर्ण : राजगोपाल 

विश्व के 25 देशों में आयोजित की जा रही है. यात्रा के दौरान लगभग पांच हजार पदयात्री पैदल चल रहे हैं और लगभग दस हजार किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी.

Written By : प्रदीप सिंह | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 28 Sep 2021, 04:26:00 PM
Peace Day

अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस (Photo Credit: News Nation)

highlights

  • जलवायु परिवर्तन को ही मुख्य मुद्दा बनाकर विश्व के कोने-कोने में यह यात्रा शुरू
  • पदयात्रा का समापन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर की जाएगी
  • न्याय और शान्ति पदयात्रा -2021 देश के 105 जिलों के साथ-साथ विश्व के 25 देशों में आयोजित की जा रही

नई दिल्ली:

एक तरफ जहां हम भारत की 75वीं आजादी वर्षगांठ का जश्न मना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आज भी जल, जंगल, जमीन का मुद्दा पहले जैसा ही है. आज भी लाखों लोगों के पास रहने के लिए आवासीय जमीन नहीं है. जिनके पास जमीन है उन्हें उनके जमीन से बेदखल करने की साजिश रची जा रही है. खासकर जंगल से लोगों को बेदखल करने की साजिश वैश्विक स्तर पर चल रही है. आदिवासियों की समस्या हम सबके सामने वैश्विक समस्या बनके उभरी है. उक्त बातें गांधीवादी विचारक राजगोपाल पी. व्ही. ने 12 दिवसीय वैश्विक पदयात्रा पर कही है. उल्लेखनीय है कि समाज में न्याय और शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एकता परिषद और सर्वोदय समाज द्वारा 12 दिवसीय न्याय और शान्ति पदयात्रा, 21 सितम्बर को अन्तराष्ट्रीय शान्ति दिवस के मौके पर शुरू की गई है.

इस कड़ी में बिहार और ओडिशा में पदयात्रा कर चुके राजगोपाल वहां की मुख्य समास्याओं के बारे में बताते हुए कहते हैं, “बिहार में जल, जंगल, जमीन के मामले में सवाल अधूरे हैं. भूदान में जिन लोगों को जमीन मिली थी वह अभी तक उनके नाम पर नहीं हो पाई है, ऐसे लोगों की जमीन खतरे में है. नदी, नाले और रेलवे पटरियों के किनारे रहने वाले लाखों लोगों के पास आवासीय जमीन का पट्टा तक नहीं है. पलायन से वापस लौटे लोगों की स्थिति और भी दुखदायी है. बिहार के संदर्भ में कहें तो पदयात्रा के दौरान लगा कि न्याय का जो सवाल है वह बहुत ही दूर है. बिहार में जमीन के सवालों को हल करने के लिए संगठित होकर प्रयास करने की आवश्यकता है.”

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ओडिशा की पदयात्रा के अनुभव के बारे में बताते हुए राजगोपाल कहते हैं, “यहां अन्य राज्यों के मुकाबले न्याय के मुद्दे पर बात करने के लिए राजनितिक जगह ज्यादा है. पिछले कई आंदोलनों के कारण जमीन की समस्या को हल करने की प्रक्रिया शुरू हुई है. लेकिन औद्योगीकीकरण यहां ज्यादा है, कई कंपनियां खनन के कारण यहां आ रही हैं. जिस कारण लोगों के हाथों से जमीन जा रही है और इसका फायदा भी लोगों को नहीं पहुंच रहा है.”

राजगोपाल आगे कहते हैं, “पदयात्रा के दौरान बिहार और ओडिशा में यह जरूर महसूस हुआ कि एक तरफ गरीब और वंचित लोगों के हाथों से जल, जंगल जमीन सरकार छीन रही है वहीं दूसरी तरफ सरकारों ने इनके लिए एक रुपया चावल, खाते में हजार रुपए जैसी अन्य योजनाओं को शुरू किया है. इससे हो यह रहा है कि सरकार इन्हें मरने तो नहीं दे रही है, लेकिन आराम से जीने भी नहीं दे रही है.”

इस पदयात्रा के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पी. व्ही. कहते हैं, “हमारी जो अन्य देशों में पदयात्रा चल रही है वह मुख्य रूप से जलवायु प्रदूषण के मुद्दे पर है. क्योंकि विश्व के लोगों को यह महसूस होने लगा है कि अगर हम अपनी जीवनशैली नहीं बदलेंगे तो कुछ सालों के भीतर दुनिया समाप्त हो सकती है. तो ऐसे में लोगों को अब लगने लगा है कि विश्व की सरकारों को जलवायु को लेकर अपनी नीति बदलनी चाहिए.” 

राजगोपाल आगे बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन को ही मुख्य मुद्दा बनाकर विश्व के कोने-कोने में यह यात्रा शुरू हो चुकी है. न्याय और शान्ति पदयात्रा लंदन, मैक्सिको, सेनेगल, फिलीपींस, सहित 25 देशों में चल रही है. वहीं प्रतिदिन शाम को वेबिनार के माध्यम से सभी देशों के पदयात्री इकट्ठा होकर जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करते हैं.

न्याय और शान्ति पदयात्रा -2021 देश के 105 जिलों के साथ-साथ विश्व के 25 देशों में आयोजित की जा रही है. यात्रा के दौरान लगभग पांच हजार पदयात्री पैदल चल रहे हैं और लगभग दस हजार किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी. इस ऐतिहासिक पदयात्रा का समापन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर की जाएगी. 2 अक्टूबर को दुनिया में अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है.

First Published : 28 Sep 2021, 04:21:55 PM

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