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शराब पर सरकार के ढीले रवैये से उमा भारती नाराज, JP नड्डा को लिखा ये पत्र

Nitendra Sharma | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 09 Jul 2022, 06:33:52 PM
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उमा भारती (Photo Credit: फाइल फोटो)

highlights

  • उमा ने नड्डा के कहने पर शराबबंदी को लेकर अपना आंदोलन टाल दिया था
  • ‘‘साध्वी के तीखे तेवर बन सकते हैं सरकार के लिये परेशानी’’

भोपाल:  

शराबबंदी को लेकर सरकार को बार-बार चेतावनी देकर बैकफुट पर आ रहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के तेवर अब तीखे दिखाई दे रहे हैं. इस मामले में अब उमा भारती ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा है. उमा ने नड्डा के कहने पर शराबबंदी को लेकर अपना आंदोलन टाल दिया था. इसके बावजूद प्रदेश में शराब पर नियंत्रण के कदम नहीं उठाए गए हैं. उमा भारती ने लिखा कि मध्य प्रदेश की नई शराब नीति प्रदेश को विनाश की ओर ले जा रही है. उमा की इस मामले में आरएसएस के नेताओं के साथ भी बैठक हो गई है. प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव से भी वे चर्चा कर चुकी हैं. इन सारे नेताओं से चर्चा के बाद भी प्रदेश में शराब की बिक्री कम करने जैसे कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. ऐसे में अब साध्वी ने र्मोचा खोलने की पूरी तैयारी कर ली है.

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उमा भारती के आंदोलन का पहला कदम अहाते बंद कराने को लेकर है. उन्होंने कहा कि अहाते बंद कर दिए जाए, जिससे लोगों के लिए जगह उपलब्ध कराकर शराब पिलाने की व्यवस्था बंद हो. उन्होंने कहा कि अहाते से लोग शराब पीकर गाड़ी चलाकर घर जाते हैं, जिससे यातायात नियमों का भी उल्लंघन होता है.

उमा भारती ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर महिलाओं के साथ भोपाल में शराब के खिलाफ मार्च निकालने की सरकार को चेतावनी भी दी है. उनका कहना है कि प्रदेश की आबकारी नीति में संशोधन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की शराब नीति में से कानून विरुद्ध, जन विरुद्ध और महिला विरुद्ध अंश हैं वे अलग होना चाहिए.

सूत्रों के अनुसार, सरकार भी उमा के तेवरों से चिंतित हैं. उमा के सामने अधिकारियों के द्वारा कुछ समय पूर्व शराब नीति को लेकर एक प्रेजन्टेशन भी किया गया. इस प्रेजन्टेशन में यह बताया गया कि अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए इस बार की नीति में परिवर्तन किए गए हैं.

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सरकार की चिंता है कि उमा के आंदोलन से लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बड़ सकती है. कांग्रेस इसका लाभ उठा सकती है. भाजपा का प्रदेश में बड़ा वोट बैंक महिला वोटर्स हैं. शराब के खिलाफ किसी भी आंदोलन से महिलाओं को जुड़ना तय है. ऐसे में भाजपा का बड़ा वोट बैंक प्रभावित हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि इसी कारण उमा को मनाने के भी प्रयास प्रारंभ हो गए हैं, जिससे वे शराब के मामले में सरकार के खिलाफ सड़कों पर न उतरें.

First Published : 09 Jul 2022, 06:25:34 PM

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