Kuno National Park: कूनो में फिर गूंजी किलकारी, मादा चीता आशा ने पांच शावकों को दिया जन्म; भारत में इतनी हुई चीतों की संख्या

Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया है. इस उपलब्धि से भारत में चीतों की संख्या बढ़ी है और ‘प्रोजेक्ट चीता’ को संरक्षण अभियान में नई मजबूती मिली है.

Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया है. इस उपलब्धि से भारत में चीतों की संख्या बढ़ी है और ‘प्रोजेक्ट चीता’ को संरक्षण अभियान में नई मजबूती मिली है.

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Deepak Kumar
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Kuno National Park:मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक खुशखबरी सामने आई है. यहां नामीबियाई मादा चीता ‘आशा’ ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है. यह खबर सिर्फ कूनो के लिये ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिये बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस सफलता से यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि भारत में चीते धीरे-धीरे खुद को फिर से बसाने लगे हैं.

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भारत में चीतों की संख्या 35 हुई

कूनो नेशनल पार्क में आशा के पांच नवजात शावकों के जन्म से भारत में इन तेज जानवरों की कुल संख्या अब 35 हो गयी है. वहीं, भारत में जन्मे शावकों की संख्या 24 तक पहुंच गयी है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए इसे ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिये गर्व और खुशी का क्षण बताया. उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण-जागरूक नेतृत्व के तहत संरक्षण प्रयासों का परिणाम है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और इसे कूनो के लिये एक गौरवपूर्ण पल बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सफलता में वन विभाग के कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की मेहनत का बड़ा हाथ है. उन्होंने कहा कि अब मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है.

दूसरी बार मां बनी ‘आशा’

विशेष बात यह है कि चीता ‘आशा’ दूसरी बार मां बनी है, जिसने पहले भी स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था. यह भारत में चीतों के आठवें सफल जन्म के रूप में दर्ज किया गया है. इस उपलब्धि को संरक्षण यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. इसके अलावा, 28 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से आठ और चीते लाये जाने का प्रस्ताव है. ऐसे समय पर शावकों का जन्म होना भविष्य के लिये सकारात्मक संकेत है और इससे कूनो की जैव विविधता और चीतों की आबादी दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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