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Mobile Game Addiction: डिजिटल युग में मोबाइल गेम बच्चों और किशोरों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन जब यह मनोरंजन लत में बदल जाए, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जहां मोबाइल और ऑनलाइन गेम की लत ने मासूम जिंदगियां छीन लीं.
भोपाल में 14 साल के छात्र ने की आत्महत्या
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र में रहने वाले 14 वर्षीय छात्र अंश साहू ने कथित तौर पर मोबाइल गेम की लत के चलते आत्महत्या कर ली. अंश आठवीं कक्षा का छात्र था और अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. घटना के समय माता-पिता एक तेरहवीं कार्यक्रम में गए हुए थे. जब वे लौटे, तो उन्होंने बेटे को फांसी के फंदे पर लटका पाया.
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया. एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी के अनुसार, कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन छात्र का मोबाइल फोन बरामद किया गया है. पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है.
ब्लू व्हेल और फ्री फायर की लत का शक
परिजनों ने पुलिस को बताया कि अंश ब्लू व्हेल गेम और फ्री फायर खेलने का आदी था. उसके मामा भोला साहू के अनुसार, कुछ समय पहले फ्री फायर गेम के लिए परिवार के खाते से करीब 28 हजार रुपये कट गए थे, जिसके बाद अंश से मोबाइल छीन लिया गया था. माना जा रहा है कि गेम से जुड़ा दबाव और मोबाइल छीने जाने की नाराजगी इस कदम की वजह हो सकती है, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
गाजियाबाद: तीन बहनों की दर्दनाक मौत
इसी तरह की एक दिल दहला देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई, जहां तीन बहनों ने कथित तौर पर ऑनलाइन कोरियन गेम्स के प्रभाव में आकर आत्महत्या कर ली. एसीपी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, तीनों बहनों ने आधी रात अपने फ्लैट की बालकनी से एक-एक कर छलांग लगा दी.
बताया गया कि उन्होंने पहले कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया, फिर कुर्सी की मदद से बालकनी से कूद गईं. गिरने की तेज आवाज सुनकर सोसाइटी के लोग और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
बढ़ती चिंता और सवाल
इन घटनाओं ने माता-पिता, समाज और प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियंत्रित गेमिंग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है. जरूरत है कि माता-पिता बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखें, उनसे संवाद बनाए रखें और समय रहते मानसिक तनाव के संकेतों को पहचानें.
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