देश का पहला और अनोखा वाइल्डलाइफ-फ्रेंडली हाईवे, जानें किस राज्य में है और क्या होगा असर?

Wildlife-Friendly Highway: देश में अपनी तरह का पहला वाइल्डलाइफ-फ्रेंडली हाईवे तैयार हो गया है. आइए जानते हैं कि किस राज्य में बना है ये हाईवे और क्या है इस अनोखे हाईवे की खासियत.

Wildlife-Friendly Highway: देश में अपनी तरह का पहला वाइल्डलाइफ-फ्रेंडली हाईवे तैयार हो गया है. आइए जानते हैं कि किस राज्य में बना है ये हाईवे और क्या है इस अनोखे हाईवे की खासियत.

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Dheeraj Sharma
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Wild Life Safe Highway

Wildlife-Friendly Highway: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मध्यप्रदेश में एक ऐसा हाईवे विकसित किया है, जो वन्यजीवों और वाहन चालकों की सुरक्षा का अनोखा उदाहरण बनकर उभरा है. भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे पर नरसिंहपुर-जबलपुर मार्ग स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लगभग 2 किलोमीटर के हिस्से को विशेष तकनीक के साथ तैयार किया गया है. यह तकनीक न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ाती है बल्कि आसपास के जंगलों में रहने वाले जीवों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

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जंगलों से गुजरते हाईवे पर खतरे क्यों बढ़ते हैं?

जंगलों के बीच से गुजरने वाले हाईवे अक्सर तेज रफ्तार वाहनों से भरे रहते हैं. वहीं वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में घूमते हुए अचानक सड़क पार करते हैं, जिससे टकराव और दुर्घटनाओं का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है. कई बार ऐसी टक्करें जानवरों की जान ले लेती हैं और वाहन चालकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है. इसी समस्या के समाधान के लिए हाईवे के इस हिस्से में विशेष सतर्कता उपाय किए गए हैं.

टेबल-टॉप रेड मार्किंग: हाईवे की सबसे खास तकनीक

NHAI ने डेंजर जोन वाले 2 किलोमीटर क्षेत्र में टेबल-टॉप रेड मार्किंग तकनीक को अपनाया है. इसमें सड़क पर 5 मिमी मोटी लाल सतह बिछाई जाती है, जो दूर से ही अलग दिखाई देती है.

इससे होने वाले फायदे:

- वाहन चालकों को तुरंत पता चल जाता है कि वे संवेदनशील ज़ोन में प्रवेश कर चुके हैं.

- लाल सतह की मोटाई के कारण वाहन स्वतः धीमे हो जाते हैं.

- गति नियंत्रित होने से जानवरों को सुरक्षित पार करने का मौका मिलता है और दुर्घटनाओं की आशंका घटती है.

वाइट शोल्डर लाइन से बढ़ी सड़क सुरक्षा

टेबल-टॉप के साथ सड़क किनारों पर वाइट शोल्डर लाइनें भी बनाई गई हैं. ये लाइने वाहन चालकों को स्पष्ट रूप से बताती हैं कि पक्की सड़क कहां समाप्त होती है. इससे वाहन कच्चे या घास वाले हिस्से में फिसलने से बचते हैं, जो रात में या बारिश के समय विशेष रूप से मददगार साबित होता है.

25 अंडरपास: जानवरों के लिए सुरक्षित मार्ग

पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए NHAI ने इस हाईवे पर लगभग 25 अंडरपास तैयार किए हैं. यह अंडरपास उन क्षेत्रों में बनाए गए हैं जहां वन्यजीवों की गतिविधि सबसे अधिक पाई जाती है.
इनका उद्देश्य-

- जानवरों को सड़क पार करने के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना

- मनुष्यों और जानवरों के बीच संपर्क को न्यूनतम करना

- दुर्घटना-प्रवण 12 किलोमीटर के ‘डेंजर जोन’ को सुरक्षित बनाना

भारत में वाइल्डलाइफ हाईवे का नया मानक

यह हाईवे भारत में वाइल्डलाइफ-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. टेबल-टॉप मार्किंग, शोल्डर लाइनें और अंडरपास जैसी सुविधाएं न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती हैं बल्कि वाहन चालकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती हैं. NHAI का यह प्रयास आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है.

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