एक साल में 1,27,00,000 का मटन खा गए कूनो नेशनल पार्क के चीते, हर दिन हो रहा इतना खर्च

मध्य प्रदेश के कूनो चीता प्रोजेक्ट में चीतों की बढ़ती संख्या के साथ उनके भोजन पर होने वाला खर्च चर्चा में है. विधानसभा में खुलासा हुआ कि एक साल में बकरी मीट पर 1.27 करोड़ रुपये खर्च हुए.

मध्य प्रदेश के कूनो चीता प्रोजेक्ट में चीतों की बढ़ती संख्या के साथ उनके भोजन पर होने वाला खर्च चर्चा में है. विधानसभा में खुलासा हुआ कि एक साल में बकरी मीट पर 1.27 करोड़ रुपये खर्च हुए.

author-image
Deepak Kumar
New Update
Cheetah Corridor

मध्य प्रदेश का महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा में है. कूनो नेशनल पार्क में रह रहे अफ्रीकी चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके भोजन और रखरखाव पर हो रहे खर्च को लेकर विधानसभा में सवाल उठे हैं. वित्तीय वर्ष 2024-25 में चीतों के लिए बकरी का मीट खरीदने पर लगभग 1 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च किए गए. यह जानकारी तब सामने आई जब कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने सदन में पूछा कि चीतों के भोजन पर सालाना कितना खर्च होता है और रोज कितने बकरे खिलाए जाते हैं. लिखित जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि चीतों के लिए अलग से कोई विशेष बजट तय नहीं है. उनके प्रबंधन और देखभाल के लिए जो राशि मिलती है, उसी से भोजन सहित अन्य खर्च पूरे किए जाते हैं.

Advertisment

हर दिन 35 हजार का मीट खा रहे चीते

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिदिन कितने बकरे दिए जाते हैं, इसका कोई निश्चित मानक नहीं है. चीतों की उम्र, स्वास्थ्य और गतिविधि के अनुसार मीट उपलब्ध कराया जाता है. आपको बता दें कि अभी प्रदेश में कुल 38 चीते हैं, जिनमें से 32 कूनो के खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं. सरकार के अनुसार चीतों के भोजन पर प्रतिदिन करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं. हालांकि जंगल में उनके शिकार के लिए चीतल भी छोड़े गए हैं, फिर भी बकरी के मीट की खरीद जारी है.

चीतों की आवाजाही को लेकर चिंता

चीतों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई गई. ग्वालियर, शिवपुरी और मुरैना के ग्रामीण इलाकों में उनके पहुंचने की खबरें आई हैं. सरकार ने माना कि खुले जंगल में रहने वाले चीते कभी-कभी गांवों तक पहुंच जाते हैं. ऐसे मामलों में वन विभाग निगरानी और मुआवजा प्रक्रिया अपनाता है.

8 चीते और लाने की तैयारी

कूनो में चीते 2022 से लाए जा रहे हैं. पहले नामीबिया और फिर दक्षिण अफ्रीका से चीते लाए गए. अब आठ और चीते लाने की तैयारी है. नए चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन में रखा जाएगा. यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण का बड़ा प्रयास है, लेकिन इसके खर्च और प्रबंधन को लेकर बहस भी तेज हो गई है.

यह भी पढ़ें- Kuno National Park: कूनो में फिर गूंजी किलकारी, मादा चीता आशा ने पांच शावकों को दिया जन्म; भारत में इतनी हुई चीतों की संख्या

Kuno National Park madhya pradesh
Advertisment