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Photograph: (X@HemantSorenJMM)
झारखंड राज्य में जंगली जानवरों, खासकर हाथियों के बढ़ते हमलों और इससे हो रही मौतों को रोकने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने अहम कदम उठाए हैं. इसी संबंध में सोमवार (16 फरवरी) को प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में वन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और हमलों की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
बैठक में लिया गया ये निर्णय
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जंगली जानवरों के हमले में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा. पहले मुआवजा मिलने में 12 दिन लगते थे, लेकिन अब इसे घटाकर 7 दिन कर दिया गया है, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके.
वन्य जीवों की निगरानी के लिए निर्देश
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वन्य जीवों की निगरानी के लिए तकनीकी सेवाओं का बेहतर उपयोग किया जाए और आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाया जाए. उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 680 हाथी मौजूद हैं. इनकी सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों की जान बचाना भी विभाग की जिम्मेदारी है.
ग्रामीणों की सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हाथियों के हमले में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को हर संभव सहायता दी जाए. साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे समय रहते सतर्क हो सकें.
आज वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुआ और हाथियों के हमलों से जान-माल की सुरक्षा के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाने हेतु सहित कई निर्देश दिए।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) February 14, 2026
साथ ही 12 दिनों के अंदर प्रभावित परिवारों को मुआवजा प्रदान करने की व्यवस्था को भी… pic.twitter.com/tDINE1h8F4
क्विक रिस्पांस टीम 30 मिनट में पहुंचेगी
बैठक में यह भी तय किया गया कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम 30 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचेगी. प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी रवि रंजन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हाथियों को शांत करने के प्रयास किए जाएं और उनकी गतिविधियों की जानकारी आसपास के वन क्षेत्रों को भी दी जाए. बैठक में कई वरिष्ठ वन अधिकारी मौजूद रहे.
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