झारखंड सरकार का बड़ा कदम, मानव-हाथी संघर्ष पर लगाम लगाने के लिए बनेगा रेस्क्यू सेंटर; 1 करोड़ होगी लागत

Jharkhand News: डिमना, जमशेदपुर में 1 करोड़ की लागत से कोल्हान का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर बनेगा. इससे मानव-हाथी संघर्ष कम करने और घायल हाथियों को समय पर इलाज देने में मदद मिलेगी.

Jharkhand News: डिमना, जमशेदपुर में 1 करोड़ की लागत से कोल्हान का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर बनेगा. इससे मानव-हाथी संघर्ष कम करने और घायल हाथियों को समय पर इलाज देने में मदद मिलेगी.

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Yashodhan Sharma
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Hemant Soren on Elephants rescue

CM Hemant Soren and Elephants

Jharkhand News: कोल्हान क्षेत्र में बढ़ती मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए जमशेदपुर के डिमना में हाथियों के लिए एक अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा. वन विभाग ने इस योजना को मंजूरी दे दी है. करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कोल्हान क्षेत्र का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर होगा. संभावना है कि इसका निर्माण अप्रैल महीने से शुरू कर दिया जाएगा.

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7 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा सेंटर

यह रेस्क्यू सेंटर डिमना लेक के पास लगभग 7 हेक्टेयर जमीन पर विकसित किया जाएगा. यहां घायल, बीमार या भटके हुए हाथियों को लाकर उनका इलाज, देखभाल और पुनर्वास किया जाएगा. केंद्र में किचन, फीडिंग सेंटर, ऑपरेशन थिएटर (ओटी), क्वारेंटाइन एरिया, जलस्रोत और सुरक्षित बाड़े जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

हाथियों की मौत की घटनाओं में आएगी कमी

अभी कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में घायल हाथियों को इलाज के लिए टाटा स्टील जू अस्पताल भेजना पड़ता है. इससे इलाज में देरी हो जाती है और कई बार हाथियों की हालत गंभीर हो जाती है. नए रेस्क्यू सेंटर के बनने से समय पर इलाज मिल सकेगा और हाथियों की मौत की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है.

सरकार ने कर दी जमीन आवंटित

दलमा वन्यजीव अभयारण्य के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि यह केंद्र वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. सरकार ने इसके लिए जमीन आवंटित कर दी है. इससे हाथियों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी.

ग्रामीणों को भी दिया जाए तकनीकी प्रशिक्षण

राज्य के कई जिलों जैसे कि रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका—में पिछले कुछ महीनों में हाथियों के हमलों से लगभग 27 लोगों की मौत हो चुकी है. इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्देश दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष एलीफेंट रेस्क्यू टीम बनाई जाए. ग्रामीणों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए और मशाल, टॉर्च, सोलर सायरन जैसे साधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि हाथियों को सुरक्षित तरीके से गांवों से दूर रखा जा सके.

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