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Himachal Political Crisis: सुखविंद सिंह सुक्खू ने की इस्तीफे की पेशकश, जानें सीएम पद की रेस में अब कौन आगे

Himachal Political Crisis: सुखविंद सिंह सुक्खू ने की सीएम पद से इस्तीफे की पेशकश, जानें सीएम पद की रेस में अब कौन आगे

Updated on: 28 Feb 2024, 01:18 PM

New Delhi:

Himachal Political Crisis: हिमाचल प्रदेश में सियासी संकट गहराता जा रहा है. बीजेपी के 14 विधायकों को निलंबित किए जाने और विक्रमादित्य के इस्तीफे के बाद अब एक और बड़ी अपडेट सामने आई है. दरअसल कांग्रेस के कद्दावर नेता और सीएम सुखविंद सिंह सुक्खू ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकर कर दी है. बताया जा रहा है कि सुक्खू के खिलाफ पार्टी के एक दो नहीं बल्कि 26 विधायकों ने मोर्चा खोल दिया था. विधायकों के विरोध और विक्रमादित्य के इस्तीफे के चलते आखिरकार सुक्खू को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि फिलहाल गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है. 

वहीं खबरें मिल रही हैं कि कांग्रेस आलाकमान  ने भी सुक्खू का इस्तीफा मंजूर कर लेगा क्योंकि कई विधायकों ने यह शर्त रखी है कि जब तक सुक्खू को सीएम पद से नहीं हटाया जाएगा तब तक वह पंचकूला से नहीं लौटेंगे.  हालांकि जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो यह सभी विधायक वहां पहुंच गए. विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने सुक्खू के इस्तीफे को मान लिया जाएगा. 

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डीके शिवकुमार ने क्या कहा
हिमाचल प्रदेश में गहराए राजनीतिक संकट को लेकर कांग्रेस के संकटमोचन और हिमचाल प्रदेश के ऑब्जर्वर बनाए गए डीके शिवकुमार ने कहा है कि मैं आलाकमान के निर्देश पर हिमाचल प्रदेश पहुंच रहा हूं. यहां पर किसी भी तरह की अफवाह को ध्यान देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने विश्वास जताया है कि सभी कांग्रेस विधायक पार्टी को लेकर वफादार हैं और जनता के फैसले का सम्मान करेंगे. 

विक्रमादित्य को मिल सकती है जिम्मेदारी
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सुक्खू के बाद पार्टी डैमेज को कंट्रोल करने के लिए कुछ ऐसे कदम उठा सकती है जो विधायकों को भी संतुष्ट करें और जो नाराज हैं उन्हें भी मनाया जा सके हैं. ऐसे में विक्रमादित्य को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. उन्हें सीएम या डिप्टी सीएम पद देने की बात जोरों पर हैं.

इससे कांग्रेस न सिर्फ विक्रमादित्य की नाराजगी को दूर करने का प्रयास करेगी बल्कि उन 9 विधायकों को साथ लाने की कोशिश करेगी जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में वोट किया है. विक्रमादित्य को बड़ी जिम्मेदारी देने के पीछे एक बड़ी वजह उनके पिता और दिवंगत वीरभद्र सिंह भी हैं.