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गुरमीत राम रहीम को हाईकोर्ट से राहत Photograph: (File)
Gurmeet Ram Rahim: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राहत रहीम को आज (शनिवार, 7 मार्च, 2026) को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई. दरअसल, हाईकोर्ट ने राम रहीम को 24 साल पुराने हत्याकांड के एक मामले में बरी कर दिया. बता दें कि डेरा प्रमुख राम रहीम को अदालत ने अक्टूबर 2002 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी कर दिया है.
राम रहीम को राहत, तीन आरोपियों की सजा बरकरार
बता दें कि पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार सुबह सीबीआई अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए डेरा प्रमुख राम रहीम को बरी कर दिया. हालांकि हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों की सजा को बरकरार रखा. बता दें कि इस मामले में कुलदीप, निर्मल और किशन लाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
किस मामले में बरी हुए डेरा प्रमुख राम रहीम?
हाई कोर्ट ने इन तीनों को कोई राहत नहीं दी और उनकी सजा को बरकरार रखा है. बता दें कि 24 अक्टूबर, 2002 को पत्रकार छत्रपति को उनके आवास पर बेहद करीब से गोली मार दी गई थी. इस हत्याकांड को अखबार में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित होने के कुछ महीनों बाद अंजाम दिया गया था. जिसमें बताया गया था कि डेरा में साध्वी के रूप में शामिल होने वाली महिलाओं का डेरा प्रमुख ने यौन शोषण किया.
Journalist Ramchandra Chhatrapati murder case | Punjab and Haryana High Court acquits Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim in the case
— ANI (@ANI) March 7, 2026
जनवरी 2019 में सुनाई गई थी सजा
इस मामले में 16 साल बाद 17 जनवरी 2019 को पंचकुला स्थित विशेष सीबीआई अदालत अपना फैसला सुनाया था. जिसमें राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. साथ ही उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था. डेरा प्रमुख और अन्य आरोपियों ने 2019 में इस फैसले को चुनौती दी और दावा किया कि उन्हें हत्या के इस मामले में झूठा फंसाया गया है.
डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ नहीं मिले हत्या के साक्ष्य
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने आरोपियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से विस्तृत बहस की गई. मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद अपना फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होना संदेह से परे साबित किया जा सके. हालांकि, तीन अन्य आरोपी कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ कोर्ट ने पाया कि उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से नजर आती है. इसी को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने तीनों की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है.
सुनारिया जेल में बंद हैं राम रहीम
बता दें कि फिलहाल डेरा प्रमुख राम रहीम 2017 के रेप के दो मामलों में 20 साल की सजा काट रहे हैं और हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद हैं. हालांकि, मई 2024 में हाई कोर्ट ने उन्हें 2002 में पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में बरी कर दिया था. इसके अलावा पंजाब में अभी भी चल रही 2015 की बेअदबी की घटनाओं से संबंधित कई एफआईआर में भी उनका नाम है.
15 बार पैरोल पर जेल से बाहर आ चुके हैं डेरा प्रमुख
बता दें कि डेरा प्रमुख राम रहीम कई बार पैरोल पर जेल से बाहर आ चुके हैं. इसी साल जनवरी में भी उन्हें 40 दिनों की पैरोल मिली थी. उससे पांच महीने पहले भी उन्हें पैरोल मिली थी. साल 2017 के बाद राम रहीम को अब तक 15 बार जेल से पैरोल मिल चुकी है. रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले करीब 8 साल में वे 400 से ज्यादा दिन की पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आ चुके हैं.
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