शंकराचार्य विवाद के बीच सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- धर्म की आड़ में सनातन को बदनाम करने की हो रही साजिश

मुख्यमंत्री योगी ने साफ किया कि धर्म का पालन और उपासना जरूरी है, लेकिन धर्म को किसी पर थोपना सही नहीं है. उनका कहना था कि सनातन परंपरा सहिष्णुता और सद्भाव का मार्ग दिखाती है.

मुख्यमंत्री योगी ने साफ किया कि धर्म का पालन और उपासना जरूरी है, लेकिन धर्म को किसी पर थोपना सही नहीं है. उनका कहना था कि सनातन परंपरा सहिष्णुता और सद्भाव का मार्ग दिखाती है.

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Dheeraj Sharma
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Yogi on shankarcharya row

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत जिले में पहुंचे. यहां उन्होंने मुरथल स्थित नागे बाबा मंदिर में आयोजित मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भाग लिया. कार्यक्रम में हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली सहित कई प्रमुख नेता और संत समाज मौजूद रहा. मंच से संबोधन के दौरान सीएम योगी ने न सिर्फ आयोजन की सराहना की, बल्कि प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया देकर चर्चा तेज कर दी.

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'धर्म और राष्ट्र ही संन्यासी की संपत्ति'-योगी

अपने भाषण की शुरुआत संतों के जयकारों के साथ करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक योगी, संत और सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं होता. उन्होंने जोर देकर कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, धर्म ही उसकी संपत्ति है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान. योगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे कई 'कालनेमि' हो सकते हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं, इसलिए समाज को सतर्क रहना चाहिए.

प्रयागराज का संदेश और आस्था की शक्ति

सीएम योगी ने प्रयागराज का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है. उन्होंने मोनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान का उदाहरण देते हुए बताया कि बड़ी संख्या में लोगों का वहां पहुंचना सनातन संस्कृति की ताकत को दिखाता है. योगी ने कहा कि भारत आज संघर्षों से भरी दुनिया के बीच भी लगातार आगे बढ़ रहा है और इसकी जड़ें उसकी संस्कृति व आस्था में हैं.

'धर्म की उपासना हो, लेकिन थोपा न जाए'

मुख्यमंत्री योगी ने साफ किया कि धर्म का पालन और उपासना जरूरी है, लेकिन धर्म को किसी पर थोपना सही नहीं है. उनका कहना था कि सनातन परंपरा सहिष्णुता और सद्भाव का मार्ग दिखाती है. उन्होंने इस मौके पर आयोजक विधायक बाबा बालकनाथ महाराज और मंदिर के महंत को गुरु परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए विशेष शुभकामनाएं भी दीं.

नाथ संप्रदाय की भूमिका पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत में नाथ संप्रदाय सबसे प्राचीन और प्रभावशाली परंपराओं में से एक है. यह संप्रदाय समाज को जीवन जीने की सही दिशा देता है और सनातन धर्म को मजबूत करने में इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक केंद्र समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता बढ़ाते हैं.

राजनीति में राष्ट्रवाद की जरूरत

अपने भाषण के अंत में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति राष्ट्रवादी सोच रखने वालों के हाथों में होनी चाहिए. उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि जो कभी कल्पना था, वह आज मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ है. योगी ने दावा किया कि आने वाले वर्षों में भारत विश्व का नेतृत्व करेगा, लेकिन इसके लिए जनता और समाज को भी विकास में भागीदार बनना होगा.

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Yogi Adityanath Haryana
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