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CM Bhupendra Patel Photograph: (X@InfoGujarat)
केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह गुजरात के वेरावल में 20 फरवरी को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास फ्रेमवर्क का शुभारंभ करेंगे. पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सक्रियता से ऐसा संभव हो पा रहा है. इस पहल की मदद से पारंपरिक और लघु मछुआरों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और एफएफपीओ को सशक्त बनाने के कदम में ऐतिहासिक माना जा रहा है.
उच्च मूल्य संसाधनों का दोहन संभव
इस एक्सेस पास की मदद से मछुआरों को भारत के 200 नॉटिकल माइल तक फैले ईईजेड क्षेत्र में कानूनी, पारदर्शी और सतत तरीके से प्रवेश की अनुमति मिलेगी. इस वजह से टूना और अन्य गहरे समुद्री प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य संसाधनों का दोहन संभव होगा. इसके अलावा, इंटरनेशनल ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा.
40 से 50 नॉटिकल माइल तक ही मछली पकड़ सकते हैं
भारत का ईईजेड करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. लेकिन अब तक अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां 40 से 50 नॉटिकल माइल तक ही सीमित है. साल 2025 में अधिसूचित नियमों से अब जिम्मेदार तरीके से गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन किया जा रहा है. मत्स्य निर्यात (2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये) को इससे और मजबूती मिलेगी.
राजगोर में वृद्धि की संभावना
बता दें, वेरावल पहले से ही प्रमुख प्रोसेसिंग और निर्यात केंद्र है. अब इस पहल का केंद्र बनकर वेरावल ब्लू इकोनॉमी के विजन को आगे बढ़ाएगा. गुजरात सरकार की सकारात्म भूमिका की वजह से अब तटीय समुदायों का आय और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.
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