Turkman Gate: क्यों तुर्कमान गेट को लेकर मचा है बवाल? जानें इसका पूरा इतिहास, ये है विवाद की जड़

तुर्कमान गेट मुगल बादशाह शाहजहां के वक्त का है. उस समय बसाए गए शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) के प्रमुख दरवाजों में से एक बताया जाता है.

तुर्कमान गेट मुगल बादशाह शाहजहां के वक्त का है. उस समय बसाए गए शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) के प्रमुख दरवाजों में से एक बताया जाता है.

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Mohit Saxena
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देश के महानगरों में अतिक्रमण बड़ी समस्या बनकर उभरा है. इसके कारण आम जनता को यातायात की समस्या का सामना करना पड़ा रहा है. इस मामले में सरकार भी तब तक एक्शन नहीं लेती, जब तक अदालत इस मामले में हस्तक्षेप न करे. देश की राजधानी दिल्ली में भी अतिक्रमण से जुड़ा  एक मामला सामने आया है, जिसका अतीत बहुत पुराना है. 

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यह मामला ऐतिहासिक तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद और उसके आसपास अवैध अतिक्रमण से जुड़ा है. यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. इस केस में अतिक्रमण को  हटाने का आदेश दिया गया है. इस केस में कार्रवाई से इलाके में जमकर बवाल मच गया है. इस दौरान यहां पर जमकर पत्थरबाजी हुई. इसे संभालने के लिए भारी पुलिस बल को तैनात किया गया. 

तुर्कमान गेट का इतिहास 

तुर्कमान गेट मुगल बादशाह शाहजहां के वक्त का है. उस समय बसाए गए शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) के प्रमुख दरवाजों में से एक बताया जाता है. 17वीं शताब्दी में यह गेट बनकर तैयार हुआ. उस समय दिल्ली एक मजबूत किलेबंद राजधानी के रूप में विकसित हो रही थी. 

नाम कैसे पड़ा तुर्कमान गेट?

मशहूर सूफी संत शाह तुर्कमान के नाम पर ये गेट है. यह दरगाह गेट के करीब मौजूद है. यहां शाह तुर्कमान की याद में हर वर्ष उर्स का आयोजन किया जाता है. इस धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण पूरा क्षेत्र सदियों तक आबाद रहा. तुर्कमान गेट की बनावट की बात की जाए तो ये एक आयताकार संरचना की तरह का है.  

पहली बार कब चला था तुर्कमान गेट पर बुलडोजर?

तुर्कमान गेट सबसे पहले चर्चा में 13 अप्रैल 1976 में सामने आया. उस वक्त देश में आपातकाल के हालात थे. यहां पर बुलडोजर चलाया गया था. उस समय संजय गांधी के निर्देश पर दिल्ली में बड़े पैमाने पर झुग्गी हटाओ अभियान को चलाया गया. तुर्कमान गेट इलाके भी बुलडोजर चला. यहां से झुग्गियों को हटाया गया.  

संजय गांधी के निर्णय पर पड़ा असर

संजय गांधी के इस निर्णय को लेकर पुरानी दिल्ली में काफी आंदोलन हुआ. जनता में अंसतोष फैल गया. स्थानीय लोगों ने हड़ताल का आह्वान किया. मजदूर संगठनों और वामपंथी दलों ने विरोध को पूरी तरह से संगठित किया. इसने हिंसक रूप में ले लिया. 19 अप्रैल 1976 को तुर्कमान गेट संघर्ष के मैदान में तब्दील हो गया. यहां पर हालात पूरी तरह से बेकाबू हो गए. पुलिस ने भी लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े. इस हिंसक टकराव में कई घायल हो गए. 

अवैध कब्जे हटाने का आदेश 

करीब पांच दशक के बाद एक बार फिर तुर्कमान गेट चर्चा में हैं. इसकी वजह फैज-ए-इलाही मस्जिद और अतिक्रमण बताया गया है. फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास ऐतिहासिक तुर्कमान गेट है. इसके आसपास सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण किया गया है. इमारतों को बना दिया गया है. अदालत ने ऐतिहासिक ढांचे के आसपास हुए अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया. 6 जनवरी 2025 को फिर से बुलडोजर चला. इस दौरान बवाल खड़ा हो गया. एमसीडी और पुलिस की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची. इसे देखते हुए स्थानीय लोगों में विरोध शुरू हो चुका है. लोग पत्थरबाजी करने लगे. पूरा इलाका छावनी में बदल गया. 

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Delhi News
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