/newsnation/media/media_files/2026/01/20/noida-engineer-yuvraj-death-2026-01-20-11-03-46.jpg)
ग्रेटर नोएडा हादसे पर सामने आई प्रशासन की एक और लापरवाही Photograph: (File/ANI)
Noida Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं. युवराज की मौत के मामले में नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही साफ तौर पर उजागर हो रही है. अब इस मामले में एक और नया खुलासा हुआ है. दरअसल, बताया जा रहा है कि साल 2023 में सिंचाई विभाग ने नोएडा अथॉरिटी को एक पत्र लिखा था. जिसमें अतिरिक्त जल निकासी की आवश्यकता बताई गई थी. लेकिन सिंचाई विभाग का ये पत्र अधिकारियों की फाइलों में दबकर रह गया. जिसके चलते परियोजना पर काम आगे नहीं बढ़ा.
पानी की निकासी के लिए होना था हेड रेगुलेटर का निर्माण
दरअसल, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने 2023 में ही नोएडा प्राधिकरण को एक पत्र लिखा था. जिसमें नोएडा के सेक्टर-150 में जमा हुए बारिश के पानी को निकालने के लिए हेड रेगुलेटर के निर्माण की जरूरत बताई थी, यहीं पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की कार शुक्रवार देर रात पानी से भरे गड्ढे में गिर गई. जिससे युवराज की मौत हो गई. युवराज की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस प्रस्तावित हेड रेगुलेटर का निर्माण हो जाता तो आज युवराज जिंदा होता. क्योंकि जिस स्थान पर पानी भरा हुआ है वजह वहां जमा होने के बजाए बह जाता. जिससे ये हादसा टल सकता था.
सिंचाई विभाग के पत्र पर क्या बोले अधिकारी?
बता दें कि हेड रेगुलेटर द्वारा जल प्रवाह को काबू किया जाता है. इसके साथ ही ये नाले या नहर में अतिरिक्त गाद को जमा नहीं होने देता. सिंचाई विभाग के पत्र को लेकर सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें उस पत्र के बारे में जानकारी नहीं है, जो पीटीआई के पास है. बता दें कि 27 वर्षीय युवराज गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे. शुक्रवार रात वह अपने ऑफिस से ग्रेटर नोएडा स्थित अपने घर लौट रहे थे, लेकिन सेक्टर-150 में घने कोहरे के चलते उनकी कार फिसल कर नाले की बाउंड्री को तोड़कर पास निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में गिर गई. जिसमें कई फीट पानी भरा हुआ था.
कभी शुरू नहीं हो सकी परियोजना
बता दें कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा 2023 में जारी एक आधिकारिक सूचना के मुताबिक, अधिकारियों ने नोएडा प्राधिकरण को सेक्टर 150 में हेड रेगुलेटर लगाने की आवश्यकता के बारे में सूचना दी थी, जिससे बारिश के अतिरिक्त पानी और जल निकासी को हिंडन नदी में प्रवाहित कर उसका निपटान किया जा सके. यही नहीं सिंचाई विभाग के इस पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि प्रस्तावित कार्य के लिए बजट का प्रावधान किया गया था, लेकिन लापरवाही का नतीजा ये हुआ कि ये परियोजना कभी शुरू नहीं हुई. अधिकारियों का कहना है कि जिस निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में इंजीनियर की कार गिरी थी, वहां बारिश के साथ-साथ आसपास की आवासीय सोसाइटियों से जुड़े नालों का पानी भी आकर भर जाता था. हिंडन नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ने पर प्रतिबंध के चलते उस स्थान पर जलस्तर लगातार बढ़ता गया.
रियल स्टेटट डेवलपर्स के खिलाफ एफआईआर
इंजीनियर युवराज की मौत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की. एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया. इसके साथ ही कई अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है. जबकि नोएडा पुलिस ने दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. वहीं यूपी सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है. जबकि युवराज के पिता राज कुमार मेहता ने स्थानीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. साथ ही इस मामले में उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की है.
ये भी पढ़ें: Noida Engineer Death: हादसे के बाद प्रशासन के बारे में देखिए स्थानीय लोगों ने क्या बताया?
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us