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दिल्ली में खुले नाले और मेनहोल एक बार फिर जानलेवा साबित हुए हैं. हाल ही में जल निगम के गड्ढे में गिरकर कमल ध्यानी की मौत का मामला सामने आया था, और अब रोहिणी में एक और युवक की खुले नाले में गिरने से जान चली गई. इस घटना ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रोहिणी में युवक की दर्दनाक मौत
ताजा मामला रोहिणी सेक्टर-32 स्थित महाशक्ति काली मंदिर के पास का है. यहां मंगलवार (10 फरवरी) शाम एक युवक खुले नाले में गिर गया. आसपास मौजूद लोगों ने हादसा होते देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही बेगमपुर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं. रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और कुछ देर की तलाश के बाद युवक को नाले से बाहर निकाला गया. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
#WATCH | Delhi: A 32-year-old man died after falling into an open drain in Rohini Sector 32, near Mahashakti Kali Temple. Visuals from the spot. pic.twitter.com/TQ2u0F1mPv
— ANI (@ANI) February 10, 2026
मृतक की हुई पहचान
मृतक की पहचान 30 वर्षीय बिरजू कुमार के रूप में हुई है. वह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला था और दिल्ली में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह डीडीए की जमीन पर बने एक खुले सीवर में गिर गया था. फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि युवक की तलाश के लिए विशेष उपकरणों के साथ टीम लगाई गई थी, लेकिन जब तक उसे बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई जगह खुले नाले और गड्ढे बिना ढक्कन या सुरक्षा घेराबंदी के पड़े रहते हैं, जिससे हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है. घटना के बाद लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, जिसे पुलिस ने हटाया.
#WATCH | A man at the spot, Sunil Kumar, says, "The man is Birju Kumar. He originally hailed from Samastipur, Bihar...He had fallen into the open drain at night...We informed the Administration, and they came here and took away the body." pic.twitter.com/DIBoq7tT36
— ANI (@ANI) February 10, 2026
हाल ही में कमल ध्यानी की हुई थी मौत
इससे पहले 25 वर्षीय कमल ध्यानी की भी इसी तरह मौत हो गई थी. वह जल बोर्ड के खोदे गए गड्ढे में गिर गया था और घंटों तक मदद के बिना तड़पता रहा. लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि आखिर कब प्रशासन इन ‘मौत के गड्ढों’ को बंद करेगा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.
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