Noida Engineer Death: सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में आज SIT सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट, जांच के घेरे में आए कई सरकारी विभाग

Noida Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआईटी ने विस्तृत जांच की है. 125 से ज्यादा अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं और आज (24 जनवरी) सीएम को रिपोर्ट सौंपी जाएगी.

Noida Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआईटी ने विस्तृत जांच की है. 125 से ज्यादा अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं और आज (24 जनवरी) सीएम को रिपोर्ट सौंपी जाएगी.

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Deepak Kumar
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Noida Engineer died

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Noida Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बता दें कि यह हादसा 16 जनवरी की देर रात हुआ, जब युवराज दफ्तर से घर लौट रहे थे. घना कोहरा था, सड़क पर कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या लाइट नहीं थी. उनकी कार सीधे लगभग 30 फुट गहरे, पानी से भरे निर्माणाधीन बेसमेंट में गिर गई और डूबने से उनकी मौत हो गई. इस मामले को अब सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि “मल्टी लेयर सिस्टम फेल्योर” माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले की जांच में जुटी हुई है. जानकारी के मुताबिक, एसआईटी आज (24 जनवरी) अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन और मुख्यमंत्री को सौंपेगी. इस रिपोर्ट के बाद तय होगा कि किन अधिकारियों और विभागों पर कार्रवाई होगी.

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SIT की जांच के दायरे में कई विभाग

एसआईटी की जांच अब केवल बिल्डर तक सीमित नहीं है. नोएडा अथॉरिटी, पुलिस, प्रशासन, आपदा प्रबंधन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और फायर विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में है. एडीजी भानु भास्कर के नेतृत्व में एसआईटी ने 125 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं. इनमें पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी, फील्ड स्टाफ और रेस्क्यू टीम के जवान शामिल हैं.

जांच में पूछे गए ये सवाल

मिली जानकारी के मुताबिक, जांच में कई अहम सवाल पूछे गए हैं- घटना की सूचना कब मिली, रिस्पॉन्स टाइम कितना था, मौके पर पहुंचने में देरी क्यों हुई, रेस्क्यू के दौरान क्या-क्या प्रयास किए गए और कहां चूक हुई. यह भी सामने आया है कि 177 पेज की एसओपी मौजूद होने के बावजूद उसे जमीन पर लागू नहीं किया गया. शुरुआती घंटों में हाई पंप, अंडरवॉटर कैमरा और विशेषज्ञ टीम समय पर नहीं लगाई गई.

अब तक 3 लोगों की हुई गिरफ्तारी

गौरतलब है कि अब तक मुख्य आरोपी बिल्डर अभय कुमार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सभी लोटस ग्रीन डेवलपर से जुड़े बताए जा रहे हैं. मामले में एफआईआर दर्ज है. वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई है- नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को पद से हटाया गया है और ट्रैफिक सेल के एक जेई को बर्खास्त किया गया है.

जांच के दौरान विभागों के लिखित जवाब और कर्मचारियों के बयानों में कई जगह विरोधाभास सामने आए हैं, जिसे एसआईटी ने गंभीरता से नोट किया है. अब सभी की नजरें आज (24 जनवरी) आने वाली अंतिम रिपोर्ट पर हैं, ताकि भविष्य में किसी और युवराज की जान न जाए.

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