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Delhi:दिल्ली के साकेत कोर्ट से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. कोर्ट के एक कर्मचारी ने आज (9 जनवरी) अदालत की इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली. इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया. पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें मृतक ने आत्महत्या के पीछे की वजहें साफ तौर पर लिखी हैं. डीसीपी साउथ के अनुसार, मृतक का नाम हरीश सिंह महार है. वह साकेत कोर्ट में ही कार्यरत थे और 60 प्रतिशत दिव्यांग थे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में किसी तरह की साजिश के संकेत नहीं मिले हैं और मामले को आत्महत्या माना जा रहा है.
सुसाइड नोट में क्या लिखा है?
हरीश ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे. उन्होंने बताया कि अहलमद बनने के बाद उन पर काम का दबाव बहुत बढ़ गया था. इसी वजह से उन्हें नींद आनी बंद हो गई थी और वह हर समय तनाव में रहते थे. उन्होंने साफ लिखा कि ऑफिस के काम के दबाव के कारण ही वह यह कदम उठा रहे हैं और इसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है.
#Delhi#WATCH#BreakingNews साकेत कोर्ट में तैनात एक अहलमद ने आज काम के दबाव में खुदकुशी कर ली। हरीश सिंह ने कोर्ट परिसर के टॉप फ्लोर से छलांग लगाई। उनके पास से एक स्यूसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उन्होंने मौते के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं बताया है। वह 60 प्रतिशत दिव्यांग थे।… pic.twitter.com/iHpMnHdVDb
— Kunal Kashyap (@kunalkashyap_st) January 9, 2026
दिव्यांग होने से बढ़ी मुश्किलें
सुसाइड नोट में हरीश ने लिखा कि वह 60 प्रतिशत दिव्यांग हैं और यह नौकरी उनके लिए बेहद कठिन होती जा रही थी. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने आत्महत्या के विचारों से लड़ने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके. समय से पहले रिटायरमेंट लेने के बारे में भी उन्होंने सोचा, लेकिन नियमों के कारण पेंशन 60 साल की उम्र में ही मिलने वाली थी, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई.
साकेत कोर्ट में एक युवा कर्मचारी ने काम के दबाव में सुसाइड किया। दिव्यांग था कर्मचारी। सुसाइड के बाद बाकी कर्मचारी खाली पदों को भरने और काम के दबाव को कम करने की माँग कर रहे हैं pic.twitter.com/k064NBLZa8
— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) January 9, 2026
नियमों में बदलाव की अपील
मरने से पहले हरीश ने हाई कोर्ट से अपील की कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए नरम और सहूलियत भरा रवैया अपनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी और को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े. उन्होंने अपनी मौत के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराया और किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया.
पुलिस जांच जारी
घटना के बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस मृतक के परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों से बात कर रही है, ताकि पूरे मामले को बेहतर तरीके से समझा जा सके.
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