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कृषि बिल के जरिए मोदी सरकार बढ़ाएगी अपने ‘मित्रों’ का व्यापार, बोले राहुल गांधी

कांग्रेस ने लोकसभा (LokSabha )में पारित हुए कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्षी दलों पर निशाना साधे जाने के बाद शुक्रवार को आरोप लगाया कि इस सरकार से किसानों का विश्वास उठ चुका है.

Bhasha | Edited By : Nitu Pandey | Updated on: 18 Sep 2020, 05:33:55 PM
rahul gandhi

राहुल गांधी (Photo Credit: फाइल फोटो)

दिल्ली:  

कांग्रेस ने लोकसभा (LokSabha )में पारित हुए कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्षी दलों पर निशाना साधे जाने के बाद शुक्रवार को आरोप लगाया कि इस सरकार से किसानों का विश्वास उठ चुका है तथा वह देश के किसान एवं मजदूरों को बरगला रही है. पार्टी ने यह भी कहा कि इस कुरुक्षेत्र में सरकार ‘कौरव’ है और किसान-मजदूर ‘पांडव’ हैं तथा कांग्रेस, पांडवों के साथ खड़ी है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्वीट किया, ‘किसान का मोदी सरकार से विश्वास उठ चुका है क्योंकि शुरू से मोदी जी की कथनी और करनी में फ़र्क़ रहा है. नोटबंदी, ग़लत जीएसटी और डीज़ल पर भारी कर. जागृत किसान जानता है- कृषि विधेयक से मोदी सरकार बढ़ाएगी अपने ‘मित्रों’ का व्यापार और करेगी किसान की रोज़ी-रोटी पर वार.’

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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को देश के किसानों को आश्वस्त किया कि लोकसभा से पारित कृषि सुधार संबंधी विधेयक उनके लिए रक्षा कवच का काम करेंगे और नए प्रावधान लागू होने के कारण वे अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेंगे. प्रधानमंत्री ने विपक्षी पार्टियों, खासकर कांग्रेस पर, आरोप लगाया कि वह इन विधेयकों का विरोध कर किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही हैं और दावा किया कि इन विधेयकों के कानून बनने के बाद 21वीं सदी में भारत का किसान बंधनों में नहीं रहेगा.

उन्होंने इन विधेयकों को देश की जरूरत और समय की मांग बताया. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम में न पड़ें और सतर्क रहें. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया, ‘प्रधानमंत्री के उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को देश को बरगलाने से परहेज करना चाहिए. ऐसा करना अशोभनीय है. दुर्भाग्य से कहना पड़ रहा है कि प्रधानमंत्री झूठ बोल रहे हैं. वह किसान विरोधी हैं और खेती पर अतिक्रमण कर रहे हैं.’

उन्होंने सवाल किया, ‘प्रधानमंत्री ने बार बार यह कहा कि ये तीनों विधेयक किसान के पक्षधर हैं. हम पूछना चाहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म करने की साजिश क्यों की जा रही है? न्यूनतम समर्थन मूल्य कैसे देंगे और कहां देंगे क्योंकि मंडिया तो खत्म हो जाएंगी? एमएसपी कौन देगा और किसको देगा?’

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सुरजेवाला ने यह भी पूछा, ‘क्या एमएसपी देने के लिए एफसीआई 62 करोड़ किसानों के खेत में जाएगी? देश में 60 फीसदी दो एकड़ से कम के मालिक हैं. वे क्या करेंगे? वो मध्य प्रदेश से मद्रास और मद्रास से कोलकाता जाकर कैसे अपनी फसल बेचेंगे?’

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने सवाल किया, ‘किसान बड़ी बड़ी कंपनियों के सामने कैसे खड़ा हो पाएगा? अगर आप मंडी खत्म करेंगे तो 62 करोड़ किसान-खेत मजदूर सामूहिक संगठन बनाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य कैसे निर्धारण करेंगे? प्रांतों की आय मार्केट फीस से होती है जिससे गांवों का विकास होता है. इसका क्या होगा?’

उन्होंने कहा, ‘इस कुरुक्षेत्र में सरकार कौरव है, पांडव देश का किसान-मजदूर है. कांग्रेस इस कुरुक्षेत्र में पांडवों के साथ खड़ी है.’

गौरतलब है कि लोकसभा ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी. 

First Published : 18 Sep 2020, 05:32:01 PM

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