ग्रेटर नोएडा में फिर हुआ दर्दनाक हादसा, पानी से भरे गड्ढे में डूबकर 3 साल के मासूम की मौत

ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव में पानी से भरे गड्ढे में डूबकर तीन साल के बच्चे की मौत हो गई. ग्रामीणों ने शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से गंभीर लापरवाही पर सवाल उठे.

ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव में पानी से भरे गड्ढे में डूबकर तीन साल के बच्चे की मौत हो गई. ग्रामीणों ने शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से गंभीर लापरवाही पर सवाल उठे.

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Deepak Kumar
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ग्रेटर नोएडा के दनकौर कोतवाली क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है. यहां पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से तीन साल के मासूम देवांश की मौत हो गई. इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और गांव में शोक का माहौल है. ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है. बता दें कि इससे पहले नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता, दिल्ली में कमल ध्यानी और बिरजू की मौत भी इसी तरह हो चुकी है.

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घटना की जानकारी

जानकारी के अनुसार, दलेलगढ़ निवासी अनिल की बेटी अंजलि की शादी सिकंदराबाद में हुई है. वह कुछ दिन पहले अपने मायके आई थी और अपने तीन साल के बेटे देवांश और बेटी को साथ लाई थी. रविवार (15 फरवरी) को गांव के मंदिर में महाशिवरात्रि के मौके पर भंडारे का आयोजन था. अंजलि अपने बच्चों और परिवार के अन्य लोगों के साथ मंदिर गई थी. इसी दौरान देवांश खेलते-खेलते मंदिर के पास बने एक गहरे गड्ढे के पास पहुंच गया, जिसमें पानी भरा हुआ था. कुछ देर बाद जब वह दिखाई नहीं दिया तो परिवार और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की. खोजबीन के दौरान वह गड्ढे में मिला. ग्रामीणों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

ग्रामीणों ने पहले ही दी थी शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों का कहना है कि इस गड्ढे में लंबे समय से पानी भरा रहता है और यह बहुत खतरनाक है. उन्होंने करीब डेढ़ महीने पहले प्राधिकरण को लिखित शिकायत देकर हादसे की आशंका जताई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय रहते गड्ढे को भरा या सुरक्षित किया जाता, तो यह हादसा नहीं होता.

प्राधिकरण ने क्या कहा?

प्राधिकरण का कहना है कि जिस जमीन पर गड्ढा है, वह एक किसान की निजी जमीन है और यह सरकारी तालाब नहीं है. वहीं पुलिस ने बताया कि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है और अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है. इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे गांव में गहरा दुख और आक्रोश है.

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