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Representative Image Photograph: (Social)
Chhattisgarh Naxal Surrender News: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लगातार कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सरकार की सख्त रणनीति के चलते नक्सलियों में हड़कंप मचा हुआ है. इसका असर यह है कि बड़ी संख्या में नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं.
सुकमा और बस्तर संभाग से आत्म
ताजा घटनाक्रम सुकमा और बस्तर संभाग से सामने आया है, जहां कुल 72 खूंखार नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर है. यह सरेंडर ऐसे समय हुआ है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 फरवरी यानी आज रात छत्तीसगढ़ के दौरे पर पहुंचने वाले हैं. इसे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय
दरअसल, केंद्र सरकार ने देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की है. इसी लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सर्च ऑपरेशन और एंटी-नक्सल अभियान को तेज कर रही हैं. लगातार हो रही कार्रवाई के चलते नक्सली संगठन कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं और कई नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं.
76 लाख रुपये का इनाम था घोषित
शनिवार को सुकमा जिले में 21 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियार डाल दिए. इन नक्सलियों पर कुल 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था. आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने SLR, AK-47, BGL लॉन्चर समेत कई ऑटोमेटिक हथियार भी जमा कराए. ये सभी नक्सली कई गंभीर वारदातों में शामिल रहे हैं. आत्मसमर्पण बस्तर आईजी पी. सुंदरराज और सुकमा एसपी किरण चव्हाण की मौजूदगी में हुआ.
बीजापुर में भी 51 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
वहीं, नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से भी बड़ी खबर सामने आई है. यहां 51 नक्सली आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं. इन नक्सलियों पर 85 लाख रुपये का इनाम घोषित है और ये AK-47, SLR, इंसास राइफल, BGL और भारी मात्रा में गोला-बारूद के साथ सरेंडर करेंगे. सुकमा और बीजापुर में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल इनाम करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताया जा रहा है.
20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ शासन की प्रभावी पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति के तहत 7 फरवरी 2026 को बीजापुर जिले में एक और बड़ी सफलता मिली. साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 30 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा और जनविरोधी विचारधारा को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. इनमें 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं. सभी ने शांति, संवाद और विकास के रास्ते पर चलने की प्रतिबद्धता जताई है.
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