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बिहार कि सियासत में हलचलें बढ़ गई हैं. क्योंकि बिहार को जल्द नया मुख्यमंत्री मिलने के संकेत हैं. जी हां प्रदेश की राजनीति में बड़ी उथल पुथल का इशारा हो रहा है. दरअसल नीतीश कुमार जल्द मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके पीछे है उनके राज्यसभा जाने की अटकलें. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार का नाम पार्टी बतौर राज्यसभा सदस्य के रूप में आगे बढ़ा सकती है. इसके पीछे कारण है उनकी बढ़ती उम्र. ऐसा होता है तो प्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा.
सियासी हलकों में खबर है कि ये मुख्यमंत्री बीजेपी का हो सकता है. ऐसे में सबसे प्रबर दावेदार सम्राट चौधरी को माना जा रहा है. जी हां सम्राट चौधरी बिहार की कमान संभाल सकते हैं. इस बार चुनाव में भी बीजेपी ने उन पर भरोसा दिखाते हुए उन्हें न सिर्फ टिकट दिया बल्कि डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी भी सौंपी थी. ऐसे में मुमकिन है कि बीजेपी उन्हें नीतीश के जाने के बाद प्रदेश का मुखिया बना दे.
सम्राट चौधरी ही क्यों? ये हैं बड़ी वजह
1. नितिन नबीन की भूमिका
सम्राट को आगे बढ़ाने में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अहम भूमिका हो सकता है. सम्राट चौधरी नितिन नबीन के काफी करीबी माने जाते हैं ऐसे में उनका नाम आगे बढ़ाने में शीर्ष नेताओं में समहमित बनाई जा सकती है.
2. प्रदेश में बड़ा चेहरा
2025 के चुनावों में बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि JDU को 85 सीटें मिली हैं. लंबे समय तक 'छोटे भाई' की भूमिका निभाने के बाद, अब बीजेपी के पास अपना मुख्यमंत्री बनाने का नैतिक और संख्यात्मक आधार है. सम्राट चौधरी इस समय बीजेपी का सबसे प्रमुख चेहरा हैं.
3. लव-कुश समीकरण का 'कुश' फैक्टर
बिहार में नीतीश कुमार (कुर्मी) और सम्राट चौधरी (कुशवाहा) का 'लव-कुश' समीकरण NDA की रीढ़ रहा है. नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में जाने की स्थिति में, ओबीसी (OBC) वोटों को एकजुट रखने के लिए कुशवाहा समुदाय के नेता को कमान सौंपना बीजेपी की सोची-समझी रणनीति है. सम्राट चौधरी इस बड़े वोट बैंक के निर्विवाद नेता के रूप में उभरे हैं.
4. आक्रामक नेतृत्व और 'एंटी-RJD' छवि
सम्राट चौधरी अपनी बेबाक बयानबाजी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं. उनकी "पगड़ी वाली कसम" (विपक्ष को सत्ता से बाहर करने तक पगड़ी न उतारने का संकल्प) ने बीजेपी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा भरी थी. बीजेपी को बिहार में एक ऐसे 'फायरब्रांड' नेता की तलाश है जो लालू परिवार के प्रभाव को चुनौती दे सके.
5. केंद्रीय नेतृत्व का अटूट भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने सम्राट चौधरी पर निरंतर भरोसा जताया है. उन्हें पहले बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया और फिर सरकार में उपमुख्यमंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं. यह साफ संकेत है कि दिल्ली दरबार उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर तैयार कर रहा है.
6. युवाओं और कैडर में लोकप्रियता
सम्राट चौधरी ने पिछले दो वर्षों में बिहार के जमीनी स्तर पर बीजेपी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत किया है. वे सोशल मीडिया और रैलियों में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं. उनकी उम्र (57 वर्ष) भी उनके पक्ष में जाती है, जिससे वे राज्य में बीजेपी के लिए एक दीर्घकालिक नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं.
निशांत को मिलेगी बड़ी भूमिका
वहीं नीतीश के बेटे निशांत कुमार का भी राजनीतिक डेब्यू लगभग तय माना जा रहा है. नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद निशांत की राजनीति में एंट्री और उन्हें प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है. जेडीयू में इसको लेकर लंबे वक्त से मंथन भी चल रहा है. नीतीश कुमार की संजय झा के साथ 3 घंटे से ज्यादा बैठक भी चली है. माना जा रहा है कि जेडीयू नेताओं में निशांत के रोल को लेकर भी सहमति बन गई है. बस औपचारिक ऐलान बाकी है.
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