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Rajgir case
Bihar News: बिहार के राजगीर में कर्नाटक से आए जैन पर्यटकों की मौत के मामले में पुलिस जांच ने नया रुख लिया है. पहले यह माना जा रहा था कि बिहार पुलिस की एक टीम कर्नाटक जाकर जांच करेगी, लेकिन अब इस फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक स्थानीय स्तर पर जो साक्ष्य और तथ्य सामने आए हैं, वे जांच के लिए पर्याप्त हैं.
रिपोर्ट के बाद ही होगा फैसला
राजगीर पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए यह मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का प्रतीत होता है. हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के बाद ही निकाला जाएगा.
परिजनों ने दान किए जेवरात
इस दर्दनाक घटना के बीच मृतक पर्यटकों के परिजनों ने इंसानियत और त्याग की एक मिसाल पेश की है. धर्मशाला के कमरे से पुलिस को जो नकदी और जेवरात मिले थे, उन्हें लेने से परिजनों ने साफ इनकार कर दिया. उन्होंने यह पूरी संपत्ति उसी दिगंबर जैन धर्मशाला को दान कर दी, जहां परिवार ठहरा हुआ था. परिजनों का कहना था कि इस दुख के बाद इन सांसारिक चीजों का उनके लिए कोई महत्व नहीं है.
राजगीर पुलिस ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद धर्मशाला प्रबंधन की मौजूदगी में दान की प्रक्रिया को संपन्न कराया. इस फैसले से स्थानीय प्रशासन और आम लोग काफी प्रभावित हैं.
ये है पूरा मामला
बता दें कि शुक्रवार सुबह दिगंबर जैन धर्मशाला के कमरा नंबर 6AB से तेज बदबू आने पर मामले का खुलासा हुआ था. पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर चारों शव फंदे से लटके मिले. मृतकों की पहचान बेंगलुरु के नागासंद्रा इलाके के रहने वाले जीआर नागा प्रसाद, उनकी दिव्यांग मां जीआर सुमंगला और उनकी दो बहनों शिल्पा व श्रुता के रूप में हुई.
इसलिए उठाया खौफनाक कदम
पुलिस जांच में सामने आया है कि नागा प्रसाद आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से गुजर रहा था. पिछले साल जुलाई में उसने गुस्से में आकर अपने भांजे की हत्या कर दी थी, जिसके बाद वह करीब पांच महीने जेल में रहा. जमानत पर छूटने के बाद परिवार गहरे अवसाद में चला गया था. पुलिस के अनुसार, इसी मानसिक दबाव और अपराधबोध के चलते पूरा परिवार तीर्थ यात्रा पर निकला और अंततः राजगीर में यह दुखद घटना घटी.
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