Bihar News: आकाश जीविका समूह की स्टॉल पर नीरा तिलकुट का जलवा, बड़ी संख्या में पहुंच रहे देशी-विदेशी पर्यटक

Bihar News: बोधगया के महाबोधि मंदिर के पास नीरा से बने तिलकुट, गुड़, अनरसा, लाई और लड्डू का स्टॉल पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना है.

Bihar News: बोधगया के महाबोधि मंदिर के पास नीरा से बने तिलकुट, गुड़, अनरसा, लाई और लड्डू का स्टॉल पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना है.

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Aditya Jha
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Bihar News: बिहार के गया की तिलकुट और लाई का स्वाद तो आपने जरूर चखा होगा. लेकिन क्या आपने नीरा से बने गुड़ के तिलकुट, अनरसा, लाई, लड्डू और चाय का स्वाद लिया है. अगर नहीं, तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया में महाबोधि मंदिर के पास एक खास स्टॉल इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां नीरा और उससे बने उत्पादों की बिक्री हो रही है.

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नीरा से बने उत्पाद आकर्षण का केंद्र

महाबोधि मंदिर परिसर के पास आकाश जीविका समूह की ओर से संचालित इस स्टॉल पर देसी और विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. यहां नीरा से बना गुड़, तिलकुट, अनरसा, लाई, लड्डू और खास नीरा की चाय मिल रही है. स्वाद अलग है और सेहत के लिहाज से भी लोग इसे बेहतर मान रहे हैं.

मजदूरी छोड़ शुरू किया नीरा का कारोबार

स्टॉल संचालक बोधगया के इलरा गांव निवासी डब्ल्यू कुमार हैं. डब्ल्यू कुमार पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे. परिवार का पालन-पोषण दिहाड़ी से होता था. लेकिन जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुई और नीरा को बढ़ावा मिला, तब उन्होंने नीरा से गुड़ और मिठाई बनाने का काम शुरू किया. डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि साल 2023 में पहली बार उन्होंने नीरा का गुड़ तैयार कर तिलकुट बनाया. उनके काम को देखने के लिए खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इलरा गांव पहुंचे थे.

कम मीठा और सेहतमंद विकल्प

डब्ल्यू कुमार का कहना है कि नीरा से बना तिलकुट सामान्य तिलकुट की तरह ही तैयार किया जाता है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें चीनी या पारंपरिक गुड़ की जगह नीरा से बना गुड़ इस्तेमाल होता है. उनके अनुसार यह तिलकुट ज्यादा मीठा नहीं होता. इसी वजह से डायबिटीज के मरीज भी इसे पसंद कर रहे हैं. ग्राहक एक बार स्वाद चखने के बाद दोबारा खरीदने जरूर आते हैं. शुरुआत में डब्ल्यू कुमार अकेले यह काम करते थे. लेकिन अब उनके परिवार के सदस्य भी इस काम से जुड़े हैं. गांव में बड़े पैमाने पर नीरा से गुड़ और उससे बने उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इससे गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है.

सरकार से मिला सहयोग

डब्ल्यू कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बोधगया और गया में बिक्री के लिए विशेष काउंटर उपलब्ध कराए हैं. तिलकुट के सीजन में रोजाना 150 किलोग्राम से ज्यादा नीरा तिलकुट की बिक्री हो रही है. इस साल एक लाख लीटर से अधिक नीरा से गुड़ तैयार किया गया है.

सरस मेले में भी अच्छी बिक्री

पटना के गांधी मैदान में आयोजित सरस मेले में भी उन्हें स्टॉल मिला था. वहां रोजाना 70 से 100 किलोग्राम तक तिलकुट की बिक्री दर्ज की गई. कीमत की बात करें तो सामान्य तिलकुट जहां 360 से 380 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं नीरा का तिलकुट 400 से 410 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है.

सर्दियों में बढ़ जाती है मांग

बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों के बीच भी नीरा तिलकुट की खास मांग है. डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि सर्दियों में बिक्री सबसे ज्यादा होती है. पितृपक्ष मेला और विशेष पूजा-पाठ के दौरान भी मांग में काफी बढ़ोतरी होती है.

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