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makhana farming
Bihar News: बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है. देश में पैदा होने वाले कुल मखाना का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार से आता है. अब मखाना की खेती और इसके व्यापार को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ठोस कदम उठा रही हैं. हाल ही में दिल्ली में हुई नेशनल मखाना बोर्ड की अहम बैठक में इसी दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं.
रिसर्च कार्यों पर विशेष जोर
बैठक में मखाना से जुड़े रिसर्च कार्यों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया. इसके साथ ही उन्नत खेती तकनीक, आधुनिक प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग, सुखाने, पॉपिंग और पैकेजिंग की सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई. सरकार मखाना के वैल्यू एडीशन, ब्रांडिंग, बेहतर मार्केटिंग सिस्टम और निर्यात को भी मजबूत करना चाहती है. इन पहलों से मखाना की खेती अब पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में सीधा फायदा होगा.
पिछले 12 वर्षों में कितना बदलाव
बिहार सरकार के प्रयासों से पिछले 12 वर्षों में मखाना की खेती का रकबा और पैदावार दोनों में तेजी से वृद्धि हुई है. वर्ष 2019-20 में शुरू की गई मखाना विकास योजना के तहत दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित ‘स्वर्ण वैदेही’ और सबौर कृषि महाविद्यालय की किस्म ‘सबौर मखाना-1’ को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाया गया. साल 2025-26 में भी मखाना अवयव योजना के जरिए क्षेत्र विस्तार, उन्नत बीज उत्पादन और खेती के लिए जरूरी टूल्स किट पर अनुदान दिया जा रहा है.
किसानों की आय में भी सुधार
मखाना उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. इसका असर राज्य के राजस्व पर भी साफ दिखता है. वर्ष 2005 से पहले जहां मछली और मखाना जलकरों से राज्य को 3.83 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये हो गया है. साथ ही, मखाना की खेती का रकबा 13 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 35,224 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है.
इन व्यवस्थाओं से मिलेगी नई मजबूती
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से मखाना की खेती को नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा. मखाना बोर्ड और केंद्रीय योजनाओं से शोध, बीज, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बाजार व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, जिससे किसानों को सही कीमत और बेहतर बाजार उपलब्ध होगा.
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