बिहार सरकार की बड़ी पहल, डिस्चार्ज से पहले मिलेगा नवजात का जन्म प्रमाण पत्र; नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर

Bihar News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब प्रसव के बाद डिस्चार्ज से पहले ही नवजात का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. आइए जानते हैं सरकार की इस पहल के बारे में.

Bihar News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब प्रसव के बाद डिस्चार्ज से पहले ही नवजात का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. आइए जानते हैं सरकार की इस पहल के बारे में.

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Yashodhan Sharma
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Bihar Birth certificate

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार में अब प्रसव के बाद माता-पिता को जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अलग से अस्पताल या सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. राज्य सरकार ने बड़ी पहल करते हुए सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में नई व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है. अब मां को अस्पताल से छुट्टी देने से पहले ही नवजात शिशु का जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर दिया जाएगा.

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स्वाथ्य विभाग ने सभी जिलों को जारी किए निर्देश

राज्य मुख्यालय के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को आदेश जारी कर दिए हैं. सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने अस्पताल प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी महिला को डिस्चार्ज करने से पहले उसके बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनाना अनिवार्य होगा. इस संबंध में रजिस्ट्रार, जन्म एवं मृत्यु निबंधन की ओर से भी पत्र जारी कर समय पर रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने को कहा गया है.

कैसी होगी नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत बच्चे के जन्म के साथ ही अस्पताल में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. अस्पताल प्रशासन उसी समय जरूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करेगा और वहीं से जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा. इससे पूरी प्रक्रिया तेज, आसान और पारदर्शी बनेगी. अभिभावकों को अलग से आवेदन करने या किसी अन्य कार्यालय में जाने की जरूरत नहीं होगी.

जन्म प्रमाण पत्र की महत्वता बताने का भी निर्देश जारी

अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और उनके परिजनों को जन्म प्रमाण पत्र के महत्व के बारे में जागरूक करें. आज के समय में जन्म प्रमाण पत्र बेहद जरूरी दस्तावेज बन चुका है. स्कूल में दाखिला, सरकारी योजनाओं का लाभ, आधार कार्ड बनवाने और अन्य जरूरी कागजात के लिए इसकी आवश्यकता होती है.

नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर

अब तक कई मामलों में नामकरण के बाद माता-पिता को फिर अस्पताल या नगर निकाय कार्यालय जाना पड़ता था. सर्वर या कागजी प्रक्रिया में देरी के कारण कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते थे. नई व्यवस्था लागू होने से इन समस्याओं से राहत मिलेगी. सरकार का मानना है कि इससे जन्म निबंधन प्रणाली और मजबूत होगी और लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी.

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