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सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: बिहार लगातार विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत अब बिहार में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार की योजना राज्य में पांच नए एक्सप्रेसवे बनाने की है, जिससे न सिर्फ यातायात आसान होगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी.
अध्ययन के बाद सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस पूरे प्रोजेक्ट के बारे में गुरुवार को मीडिया को जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण की प्रक्रिया को गहराई से समझने के लिए सड़क निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और दो वरिष्ठ अभियंताओं को महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश भेजा गया है. ये दोनों राज्य अपने सफल एक्सप्रेसवे मॉडल के लिए जाने जाते हैं. वहां के अध्ययन के बाद सचिव अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे. इसके आधार पर एक्सप्रेसवे के लिए फंडिंग मॉडल और किन इलाकों में सड़कें बनेंगी, इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
बनाई गई एक्सप्रेसवे कंस्ट्रक्शन अथॉरिटी
मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए अलग से एक्सप्रेसवे कंस्ट्रक्शन अथॉरिटी बनाई गई है. बिहार सरकार भी इसी तर्ज पर एक नई अथॉरिटी के गठन पर विचार कर रही है. इसका मकसद यह है कि एक जिले से कई जिलों की सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके और दूर-दराज के इलाकों से पटना तक पहुंचने का समय कम किया जा सके.
केंद्रीय स्तर पर भी 4 परियोजनाएं प्रस्तावित
इसके साथ ही केंद्र सरकार के स्तर पर भी बिहार में चार एक्सप्रेसवे परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जो फिलहाल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में हैं. मंत्री ने बताया कि पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से एक्सप्रेसवे नंबर भी मिल चुका है. वहीं गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे और रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है. रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार के साथ-साथ नेपाल को भी पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जोड़ेगा.
यहां फिर से काम शुरू
इसके अलावा वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे परियोजना पर भी फिर से काम शुरू हो गया है, जो पहले जमीन अधिग्रहण की वजह से अटकी हुई थी. इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार की कनेक्टिविटी और विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
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