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दक्षिण भारत की राजनीति में नए सितारे 'शर्मिला' का उदय

वायएस राजशेखर रेड्डी की जयंती पर तेलंगाना में नई पार्टी लांच कर शर्मिला ने समानता, जनकल्याण और आत्मनिर्भरता को नवगठित पार्टी के तीन आधार स्तंभ करार दिए हैं.

Written By : राजीव मिश्रा | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 09 Jul 2021, 02:16:43 PM
YSR Sharmila

अपने पिता वायएस राजशेखर रेड्डी पर गई हैं शर्मिला. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • संयुक्त आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वायएस राजशेखर रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला
  • वर्तमान आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी की बहन हैं शर्मिला
  • जगन को सत्ता दिलाने के बाद अब तेलंगाना को बना रहीं कर्म भूमि

नई दिल्ली:

दक्षिण की राजनीति में एक औऱ सितारे का उदय हो गया है. संयुक्त आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री वायएस राजशेखर रेड्डी की बेटी और वर्तमान आंध्र प्रदेश की सीएम जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) की बहन वायएस शर्मिला (YS Sharmila) ने तेलंगाना में अपनी नई पार्टी वायएसआर तेलंगाना पार्टी (YSRTP) लांच कर दी है. वायएस राजशेखर रेड्डी की जयंती पर तेलंगाना में नई पार्टी लांच कर शर्मिला ने समानता, जनकल्याण और आत्मनिर्भरता को नवगठित पार्टी के तीन आधार स्तंभ करार दिए हैं. इसके साथ ही शर्मिला ने नारा दिया कि उनकी पार्टी जनसंख्या के आधार पर पिछड़े वर्ग को आरक्षण देगी. साथ ही शर्मिला ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी से 50 फीसदी टिकट महिलाओं को देने की बात कही है. इसके साथ ही शर्मिला ने पहले ही दिन तेलंगाना (Telangana) के सीएम के चंद्रशेखर राव (K Chandrashekhar Rao) पर तीखा और सीधा हमला बोला. 

पिता की हैं सारी खूबियां मौजूद
वायएस शर्मिला भले ही अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ी हैं, लेकिन उनमें अपने पिता की सभी खूबियां मौजूद हैं. शर्मिला को दक्षिण में भीड़ जुटाने वाली नेता के रूप में जाना जाता है. वायएस राजशेखर रेड्डी 2004 से 2009 में एक हेलीकॉप्‍टर क्रैश में हुई अकाल मृत्‍यु तक संयुक्‍त आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री थे. उनके निधन के बाद जब कांग्रेस ने वायएस राजशेखर रेड्डी के परिवार को तवज्‍जो देना बंद कर दिया, तो उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी ने वायएसआर कांग्रेस नाम से अलग पार्टी बना ली. शर्मिला के काम करने का तरीका और हाव-भाव काफी हद तक अपने पिता से मिलता-जुलता है. 

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भाई जगन के जेल जाने पर निकाली थी पदयात्रा
2013 में जब जगन मोहन रेड्डी पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे और उन्‍हें जेल जाना पड़ा तब शर्मिला ने आंध्र प्रदेश में पदयात्रा निकाली थी. इसके बाद से आंध्र प्रदेश की राजनीति में वायएसआर कांग्रेस की पकड़ मजबूत होने लगी. शर्मिला ने 2019 के हुए विधानसभा चुनावों में अपने भाई के लिए जमकर प्रचार किया. इसी का नतीजा रहा कि जगन मोहन रेड्डी सीएम की कुर्सी तक पहुंच गए. जगन की जीत के बाद इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि शर्मिला को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा या फिर राज्‍यसभा से राजनीति में भेजा जाएगा. हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

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जगन के सीएम बनने के दो साल बाद सक्रिय राजनीति में कदम
2019 के विधानसभा चुनावों के बाद शर्मिला राजनीति से दूर हो गईं. करीब दो साल बाद वह एक बार फिर सक्रिय राजनीति का हिस्‍सा बनने जा रही है. उन्‍होंने नई पार्टी का ऐलान करते हुए कहा कि तेलंगाना में कोई रजन्‍ना राज्‍यम (वायएसआर का शासन) नहीं है और हमें समझना होगा क्‍यों..; हम यहां वायएसआर शासन लाएंगे. इस दौरान पार्टी के पोस्‍टर से जगन की तस्‍वीर गायब थी. इससे इस बात का अंदाजा तो लग गया है कि वह जगन के बिना ही तेलंगाना में अपनी ताकत दिखाना चाहती हैं. हालांकि उन्‍होंने इतना जरूर कह दिया है कि उनके साथ भाई वायएस जगन मोहन रेड्डी का आशीर्वाद है. इस मौके पर जगन और शर्मिला की मां वायएस विजयअम्मा भी मौजूद रहीं. इससे साफ पता चलता है कि भाई आंध्र प्रदेश तो बहन तेलंगाना में राजनीति की बिसात संभालेगी.

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First Published : 09 Jul 2021, 02:12:57 PM

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