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पुडुचेरीः CM-LG की लड़ाई ने 'दिल्ली' को पीछे छोड़ा, बेदी का जाना BJP के लिए फायदेमंद

किरण बेदी के फैसलों के खिलाफ कई बार राजभवन के बाहर धरने पर बैठे मुख्यमंत्री नारायणसामी (V Narayanaswamy) की एलजी से हमेशा सरकार चलाने को लेकर खींचतान चलती रही.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 17 Feb 2021, 12:56:06 PM
Kiran Bedi

रिटायरमेंट के 100 दिन पहले गई बेदी का रहा सीएम से विवादों से नाता. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • शुरुआत से ही सीएम नारायणस्वामी और एलजी किरण बेदी की पटरी नहीं बैठी
  • बेदी पर सरकारी काम में हस्तक्षेप का आरोप लगा कई बार धरना दिया सीएम ने
  • हालांकि अल्पमत में आई कांग्रेस बेदी के जाने से एक बड़े मुद्दे से हाथ भी धो बैठी

पुडुचेरी:

पुडुचेरी के उपराज्यपाल पद से अंततः किरण बेदी (Kiran Bedi) को मंगलवार देर रात हटा ही दिया गया. किरण बेदी के फैसलों के खिलाफ कई बार राजभवन के बाहर धरने पर बैठे मुख्यमंत्री नारायणसामी (V Narayanaswamy) की एलजी से हमेशा सरकार चलाने को लेकर खींचतान चलती रही. उनका हर बार आरोप यही रहा कि एलजी एक चुनी हुई सरकार को काम करने नहीं दे रही हैं. चाहे वह हेलमेट प्रकरण हो या फिर टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट... हर बार एलजी और सीएम आमने-सामने आते रहे. आमने-सामने भी आते तो भी गनीमत रहती, बयानबाजी का स्तर भी कई बार निम्न से निम्नतम स्तर को छूता गया. यहां तक कि सीएम ने एक मौके पर उपराज्यपाल बेदी को राक्षस तक करार दे दिया. हाल-फिलहाल बेहद नाटकीय घटनाक्रम में कांग्रेस के चार विधायक इस्तीफा दे चुके हैं और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को दौरे पर हैं. इसके ऐन पहले किरण बेदी को हटाए जाने को भले ही कांग्रेस अपनी जीत बता रही हो, लेकिन सच्चाई तो यही है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने किरण बेदी को हटाकर कांग्रेस के हाथ से एक बहुत बड़ा मुद्दा छीन लिया है. 

किरण बेदी को 100 दिन बाद होना था रिटायर
गौरतलब है कि पुडुचेरी के उपराज्यपाल बतौर किरण बेदी लगभग 100 दिन के बाद रिटायर होने वाली थीं. किरण बेदी ने 29 मई 2016 को पुडुचेरी के उपराज्यपाल की शपथ ली थी. इस हिसाब से 29 मई 2021 को उनका कार्यकाल पूरा होने वाला था, लेकिन इस बीच एक बड़े घटनाक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें उपराज्यपाल के पद से हटा दिया. इसके पहले कई मोर्चों पर पर मुंह की खाने और दिल्ली विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद राष्ट्रपति भवन से हुई पुडुचेरी के उपराज्यपाल पद पर नियुक्ति ने किरम बेदी का राजनीतिक रुतबा फिर बढ़ा दिया था. ऐसे में किरण बेदी मात्र साढ़े तीन महीने बाद एलजी के पद पर अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाली थीं. वह पुडुचेरी के राजभवन से एक सम्मानजनक फेयरवेल की तैयारी कर रही थीं, लेकिन वक्त से पहले ही उनके लिए फरमान जारी हो गया.

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जनवरी में फिर शुरू किया था नारायमस्वामी ने धरना
सीएम वी. नारायणसामी ने केंद्र सरकार से उपराज्यपाल किरण बेदी को वापस बुलाने की मांग करते हुए जनवरी में राज निवास के पास अपना प्रदर्शन शुरू किया था. इसके तहत पुडुचेरी में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गठबंधन ने राज्यपाल किरण बेदी के खिलाफ चार दिवसीय विरोध शुरू किया था. इसके लिए सरकार की ओर से दावा किया गया कि वह निर्वाचित सरकार को काम करने की अनुमति नहीं दे रही हैं. कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने उपराज्यपाल किरण बेदी पर सरकार की विकास योजनाओं और कल्याणकारी कदमों को बाधित करने का आरोप लगाया. इस धरना-प्रदर्शन के चंद दिनों बाद ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किरण बेदी को उपराज्यपाल पद से हटा दिया. पिलहाल यह जिम्मेदारी तेलंगाना के राज्यपाल डॉक्टर तमिलिसाई सुंदरराजन को उप-राज्यपाल के अतिरिक्त कार्यभार बतौर सौंपी गई है.

विधानसभा अध्यक्ष से था अधिकार पर विवाद
गौरतलब है कि दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल व पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच सत्ता की लड़ाई की तर्ज पर कांग्रेस शासित प्रदेश पुडुचेरी में उपराज्यपाल किरण बेदी और विधानसभा अध्यक्ष वी वैतिलिंगम के बीच क्षेत्राधिकार का विवाद बढ़ता आया है. इस विवाद में नया मोड़ 2017 में तब आया जब सीएम वी नारायणसामी ने केंद्र से उपराज्यपाल किरण बेदी को वापस बुलाए जाने का अनुरोध कर डाला. मामला था पुडुचेरी नगर निगम आयुक्त आर चंद्रशेखरन के तबादले का, जिसको लेकर उपराज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के बीच विवाद शुरू हुआ. किरण बेदी पर आरोप था कि उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया, जिसके बाद किरण बेदी के सचिव को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने समन जारी किया है.

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सीएम ने एलजी को हिटलर की बहन तक बताया
सीएम नारायणसामी किरण बेदी के पुडुचेरी का राज्यपाल बनने के बाद से ही उनके काम करने के तरीकों पर सवाल उठाते रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि वह चुनी हुई सरकार के फैसलों को ठुकराकर सरकार के नियमित कामकाज में बेवजह दखल देती हैं. सीएम नारायणसामी का कहना रहा है कि जब भी उन्हें किरण बेदी की सरकारी फैसलों को नामंजूर करने से जुड़ी फाइलें मिलती हैं तो उनका खून खौल उठता है और वह झुंझला जाते हैं. उनका तर्क था कि देश में किसी भी प्रदेश का राज्यपाल या केंद्र शासित प्रदेश का उपराज्यपाल अपने राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के नियमित कामकाज में दखल नहीं देता. यहां तक कि नारायणस्वामी पुडुचेरी की उपराज्यपाल को जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर की बहन तक बताने से नहीं चूके. 

हेलमेट पर उलझे थे सीएम और एलजी
बीते साल ही सीएम एन नारायणसामी और किरण बेदी हेलमेट के विषय पर बहस में उलझ चुके हैं. दरअसल किरण बेदी ने सोशल मीडिया पर सीएम की एक फोटो शेयर की थी. इस फोटो में नारायणसामी बिना हेलमेट पहनकर बाइक पर नजर आ रहे थे. इसके जवाब में सीएम ने भी किरण बेदी की एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की थी. इसमें वह बिना हेलमेट के नजर आ रही थी. यहां से शुरू हुआ विवाद राक्षस जैसे बयानबाजी तक पहुंचा. किरण बेदी का मुख्यमंत्री द्वारा राक्षस कह जाने वाले बयान पर पलटवार आया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एन नारायणमामी ने गलती से ऐसा कहा होगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि वह उन्हें असली राक्षस को खोजने में उनकी मदद कर सकती हैं. 

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टी-20 मैच भी विवाद बना
बीते साल ही नारायणसामी सरकार और उपराज्यपाल के बीच तकरार टी-20 मैच को लेकर और बढ़ी. पुडुचेरी के खेल मंत्री मल्लदी कृष्ण राव ने आरोप लगाया कि किरण बेदी वास्तव में नारायणस्वामी सरकार से काफी जलती हैं. इसी वजह से वह केंद्र शासित प्रदेश में टी 20 टूर्नामेंट को रोकने की कोशिश कर रही हैं. बताते हैं कि किरण बेदी ने जिला कलेक्टर को क्षेत्र के बाहरी इलाके में सरकारी भूमि पर 'अतिक्रमण' के लिए क्रिकेट स्टेडियम के प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था. इसके बाद खेल मंत्री मल्लदी कृष्ण राव ने यह बयान दिया. 

सिंगापुर यात्रा भी नहीं बची विवादों से 
नारायणसामी की सिंगापुर यात्रा भी विवाद का कारण बनी थी. सीएम का कहना था कि वह केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही उद्योग मंत्री शाहजहां और डीएमके विधायक शिवा के साथ सिंगापुर गए थे और उन्होंने खुद यात्रा का खर्च उठाया था. सीएम के मुताबिक उपराज्यपाल ने इस यात्रा पर सवाल उठाए थे. सीएम का कहना था कि यात्रा के लिए बेदी की मंजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह उनके नौकर या गुलाम नहीं हैं. गौर हो कि बेदी ने कहा था कि उन्हें मीडिया के जरिए यात्रा के बारे में पता चला. उन्होंने सवाल उठाया था कि इस यात्रा के लिए जरूरी मंजूरी ली गई थी या नहीं.

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किरण गईं, कांग्रेस का बहुमत भी ले गईं
इन तमाम विवादों के बीच किरण बेदी को उप-राज्यपाल के पद से हटाए जाने का आदेश तब आया है, जब इस केंद्र-शासित प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने बहुमत खो दिया है. सत्तारुढ़ कांग्रेस के चार सदस्य पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके हैं, जबकि एक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किया जा चुका है. पार्टी के एक विधायक ने मंगलवार को इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सदन में बराबर सदस्य हो गए हैं. इस तरह दक्षिण के केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार अल्‍पमत में आ गई है. हालांकि सीएम नारायणसामी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि उनकी सरकार संकट में है, लेकिन वह आरोप भी लगा रहे हैं कि यह पूरी कवायद बीजेपी का 'ऑपरेशन लोटस' है जिसके जरिए बीजेपी गैर बीजेपी शासित राज्‍यों में विधायकों की खरीद-फरोख्‍त कर अपनी सरकार बना लेती है. 33 सदस्यों वाली विधानसाभ में अभी कुल 28 सदस्य हैं जिसमें दोनों पक्षों के पास अब 14-14 विधायक हैं. इनमें 3 मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं.

किरण बेदी के जाने से बीजेपी को लाभ!
किरण बेदी को हटाए जाने से एक तो कांग्रेस के पास जल्‍द होने वाले विधानसभा चुनावों में से एक मुद्दा कम हो गया. दूसरा, नई उप राज्‍यपाल तमिलनाडु की हैं, पुडुचेरी की राजनीति में तमिलनाडु का काफी असर रहता है. इस ल‍िहाज से यह बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होगा. गौरतलब है कि किरण बेदी ने बुधवार सुबह ट्वीट करके अपने इस कार्यकाल के दौरान सभी के सहयोग पर धन्‍यवाद दिया है. किरण बेदी ने अपने ट्वीट के साथ वीडियो पोस्‍ट किया है जिसमें वह अपना संदेश पढ़कर सुना रही हैं. किरण बेदी ने ल‍िखा है, 'पुडुचेरी के उप राज्‍यपाल के रूप में मेरी यात्रा में शामिल पुडुचेरी की जनता और सरकारी अफसरों को धन्‍यवाद.'

First Published : 17 Feb 2021, 12:43:36 PM

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