News Nation Logo

श्रीलंका के बाद अब नेपाल भी चीन से दूर जा, करीब आ रहा भारत के

नई दिल्ली नेपाल में चीन द्वारा की जा रही घुसपैठ से सावधान है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में उसकी सुरक्षा और नेतृत्व की स्थिति के लिए चुनौती है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 01 Apr 2022, 08:16:22 AM
Deuba Modi

शेर बहादुर देउबा अब भारत से संबंधों की पुख्तापन देने आ रहे. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • नेपाल ने चीन की बीआरआई प्रोजेक्ट में शामिल होने से किया इंकार
  • भारत संग नेपाल के शहरों को जोड़ने की रेल परियोजनाओं का हामी

नई दिल्ली:  

भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंध थोड़े समय की सुस्ती और गलतफहमियों के बाद अब सामान्य हो रहे हैं. दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं. अपनी आगामी भारत यात्रा के दौरान नेपाली प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन संबंधों के बीच मुख्य विशेषता भारत द्वारा वित्त पोषित सीमा पार रेलवे परियोजना का शुभारंभ होगा. नेपाल की राजधानी काठमांडू के साथ एक भारतीय शहर को जोड़ने वाली एक और रेलवे लाइन की घोषणा होने की संभावना है. नेपाल द्वारा बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में शामिल होने के चीन के प्रस्ताव को ठुकराने के मद्देनजर यह कदम द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत महत्व रखता है.

भारत की निगाहे टिकी हैं नेपाल में चीनी घुसपैठ पर
नई दिल्ली नेपाल में चीन द्वारा की जा रही घुसपैठ से सावधान है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में उसकी सुरक्षा और नेतृत्व की स्थिति के लिए चुनौती है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी की हाल की नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए और उनका आदान-प्रदान किया, लेकिन उनमें से कोई भी बीआरआई से संबंधित नहीं था. चीन के लिए यह एक बड़ी निराशा है, क्योंकि वांग यी की यात्रा के लिए बीआरआई सर्वोच्च प्राथमिकता थी. नेपाल ने विशेष रूप से चीनी फर्मों के लिए आरक्षित अनुबंधों और बीआरआई ऋणों के लिए उच्च ब्याज दरों जैसी कठोर शर्तो पर चिंता व्यक्त की.

यह भी पढ़ेंः China भारत में घुसा तो Russia बचाने नहीं आएगा... अमेरिका की धमकी या नसीहत

नेपाल के लिए नजीर बना श्रीलंका 
श्रीलंका नेपाल के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे ऋण चुकाने में विफलता और बीआरआई शर्तो का पालन करने से वित्तीय संकट और यहां तक कि संप्रभुता का नुकसान हो सकता है. दूसरी ओर, भारत से ऋण बिना किसी दिक्कतों के आए हैं। भारत की ओर से नई रेलवे लाइन की पूरी लागत भी वहन करने की उम्मीद है. भारत और नेपाल के बीच घनिष्ठ संबंध हैं जो सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की विशेषता है. भारत नेपाल को आवश्यक वस्तुओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है और काफी संख्या में नेपाली नागरिक भारत में आजीविका कमाने के लिए रहते हैं. भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी भारत सबसे पहले प्रतिक्रिया करने वाला देश रहा है और वह नेपाल को हर संभव सहायता सुनिश्चित करता रहा है. भारत ने नेपाल को 10 लाख कोविड-19 टीके दान किए हैं, जब देश महामारी की चपेट में था और नए मामलों की संख्या खतरनाक दर से बढ़ रही थी.

भारत हर सुख-दुख में मदद कर रहा नेपाल की
हिमालयी देश में कोविड-19 की चपेट में आने के बाद भारत ने नेपाल को आवश्यक चिकित्सा उपकरण और दवाएं, साथ ही एम्बुलेंस और वेंटिलेटर दान किए. जब 2021 के मध्य में कोविड-19 की दूसरी लहर नेपाल में आई, तो केवल भारत ही उसके बचाव में आया. भारी घरेलू मांग के बावजूद नेपाल को लिक्विड ऑक्सीजन भेजने वाला यह एकमात्र देश था. जरूरत के समय में मदद ने भारत ने नेपाली लोगों की सद्भावना अर्जित की. महत्वपूर्ण समय पर टीके उपलब्ध कराने के लिए भारत को धन्यवाद देते हुए तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने कहा था, नेपाल एक पड़ोसी मित्र (भारत) के इस कदम की सराहना करता है. आम नेपाली लोगों ने भी भारत को धन्यवाद दिया और एक मजबूत दोस्ती की उम्मीद की. भीष्म राज शिवकोटी ने कहा, 'हमारे दक्षिणी पड़ोसी की ओर से इस उदारता की बहुत सराहना.. यह वास्तव में भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति को प्रकट करता है. अब भारत ने नेपाल से कोविड-19 रिकवरी के बाद इसका समर्थन करने का वादा किया है.'

यह भी पढ़ेंः बड़ी राहत: नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 10 दिनों में इतनी बढ़ी कीमत

यूक्रेन संकट के दौरान ऑपरेशन गंगा में भी की मदद
यूक्रेन के हमले के बीच भारत ने फंसे नेपालियों को निकालने में मदद की है. ऑपरेशन गंगा के तहत विभिन्न यूक्रेनी शहरों से भारत द्वारा कम से कम छह नेपाली नागरिकों को लाया गया था. देउबा ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'नेपाली नागरिकों को वापस लाने में सहायता' के लिए धन्यवाद दिया. 2021 में भारत ने अफगानिस्तान से भी कई नेपाली लोगों को निकाला था. गलतफहमी के कोहरे के बीच नेपाल ने महसूस किया कि भारत उसका सच्चा भरोसेमंद दोस्त है. नेपाल पिछले एक साल से भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. जुलाई 2021 में देउबा के प्रधानमंत्री बनने के बाद इसे गति मिली है.

हरसंभव सम्मान से नवाजा
नवंबर में अपनी भारत यात्रा के दौरान, नेपाल के सेना प्रमुख जनरल प्रभुराम शर्मा को भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मानद 'भारतीय सेना के जनरल' की उपाधि से सम्मानित किया गया था. अब देउबा की यात्रा में वाराणसी की यात्रा शामिल होगी. वाराणसी दोनों देशों के हिंदू और बौद्ध समुदायों के बीच धार्मिक संबंध का सामान्य बिंदु है. देउबा की यात्रा राजनीतिक नेतृत्व के बीच संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक बंधन को मजबूत करेगी. भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, 'आगामी यात्रा दोनों पक्षों को इस व्यापक सहकारी साझेदारी की समीक्षा करने और दोनों लोगों के लाभ के लिए इसे आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी.'

First Published : 01 Apr 2022, 08:16:22 AM

For all the Latest Specials News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.