News Nation Logo

अग्निपथ पर पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह बोले-विपक्ष के इशारे पर हो रही हिंसा 

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि अग्निपथ का विरोध  विपक्षी दलों के उकसाने के कारण हो रहा है. वे सेना को नहीं जानते हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 18 Jun 2022, 07:31:34 PM
vksingh

ज. वीके सिंह, पूर्व सेना प्रमुख (Photo Credit: News Nation)

नई दिल्ली:  

पूर्व सेना प्रमुख और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने सरकार की अग्निपथ योजना का समर्थन करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसक भीड़ को विपक्षी दलों द्वारा उकसाया और गुमराह किया गया है. योजना का विरोध करने के लिए टूल-किट का इस्तेमाल किया जा रहा है.  हिंसा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को जलाने के लिए लोगों को 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से सेना, नौसेना और वायु सेना में प्रवेश करने वाले 'अग्निवीर' को अन्य सैनिकों और अधिकारियों के समान प्रशिक्षित किया जाएगा. चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर अग्निवीरों के लिए उपलब्ध अवसरों के बारे में गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं. जबकि  पूर्व सैनिकों को कई नौकरियों में आरक्षण और रियायत दी जाती है.   

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि अग्निपथ का विरोध  विपक्षी दलों के उकसाने के कारण हो रहा है. वे सेना को नहीं जानते हैं. हमारे सेना के पास एक शिक्षा प्रणाली है जो मुक्त विश्वविद्यालय के समान है. लोगों को परीक्षा के बाद डिप्लोमा या डिग्री मिलती है. यदि कोई व्यक्ति अपनी शिक्षा जारी रखना चाहता है, तो वह कर सकता है. वे कॉलेज जा सकते हैं और उन्हें रियायतें मिलेंगी.

क्या है आपातकाल कमीशन

अग्निपथ से भारतीय सशस्त्र बलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि, भारतीय सशस्त्र बलों ने कई आकस्मिकताओं और विभिन्न स्थितियों के हिस्से के रूप में कई चीजों की कोशिश की है. 1961 में, हम सेना में और (सैनिकों) को लाने के लिए आपातकालीन कमीशन लेकर आए. 1962 से 1965 तक उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अफसोस के साथ पीछे मुड़कर देखने के लिए कुछ भी नहीं है. उनका तीन महीने का प्रशिक्षण था.

यह भी पढ़ें: अब आम आदमी भी खरीद सकेंगे इलेक्ट्रिक कार, नितिन गडकरी ने की बड़ी घोषणा

1965 में, हमने आपातकालीन आयोग को समाप्त करने का निर्णय लिया. बाद में प्रशिक्षण की अवधि नौ महीने और कमीशन की अवधि पांच साल थी. पांच साल बाद, हमने प्रदर्शन का आकलन किया और बाकी लोगों को छोड़ने के लिए कहा गया. पेंशन नहीं थी. एकमुश्त राशि भी नहीं थी.

राष्ट्रीय राइफल के साथ भी हुआ प्रयोग

भारतीय सेना ने राष्ट्रीय राइफल बटालियन के साथ भी प्रयोग किया. उस समय भी कई लोगों ने कहा कि यह प्रयोग सफल नहीं होगा क्योंकि हमने हर तरफ से लोगों को आकर्षित किया है. समय के साथ, उन्होंने कुछ रेजिमेंटल पहचान बनाए रखने के लिए सिस्टम को बदल दिया. उदाहरण के लिए, आधी राजपूत बटालियन इंजीनियर या सशस्त्र कोर या अन्य होंगे. यह सफल रहा. यह कहने के लिए कि यह कैसे लागू होगा, इसका आकलन तब तक नहीं किया जा सकता जब तक इसे लागू नहीं किया जाता. यह कैसे प्रभाव डालेगा, यह जानने के लिए एक योजना लागू की जानी चाहिए.

कम नहीं है छह महीने का प्रशिक्षण  
 
छह महीने के प्रशिक्षण से आवश्यक गुणवत्ता प्रभावित होने के सवाल पर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि, यह कहना बकवास है कि छह महीने का प्रशिक्षण गुणवत्ता को प्रभावित करेगा. जवान की ट्रेनिंग एक साल की होती है. उसकी ट्रेनिंग उस यूनिट में होती है जो लगातार होती है. प्रभाव अच्छा, उत्कृष्ट हो सकता है या कुछ पाठ्यक्रम सुधार की आवश्यकता हो सकती है.

कोविड-19 के कारण सभी भर्तियां रोकनी पड़ीं. नियम सरल है. जब आप सेना में प्रवेश करते हैं, तो आपकी आयु 23 वर्ष या उससे कम होनी चाहिए. अगर ऐसा है, तो वे चूक गए. वे इसलिए नहीं चूके क्योंकि सरकार उन्हें नहीं चाहती थी, बल्कि मौजूदा स्थिति के कारण चूक गए. हमारी समस्या यह है कि प्रत्येक रिक्ति के लिए 100 लोग आते हैं. उन 100 में से दो से तीन से अधिक का चयन नहीं होता है.

वे सभी जिन्होंने परीक्षा दी है ... वे कैसे मान रहे हैं कि सिर्फ इसलिए कि उन्होंने परीक्षा दी, वे योग्यता में होंगे और चयनित हो जाएंगे? लिखित परीक्षा की गणना की जाएगी. लेकिन इस योजना के मद्देनजर यह कैसे होगा... सरकार उचित निर्णय लेगी. मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि सरकार युवाओं की मदद करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने उम्र बढ़ा दी है. यदि आप अच्छी तरह से तैयार हैं, तो आप सेना के मानकों को पूरा करते हैं और हमारे पास आते हैं. शॉर्ट सर्विस कमीशन के अधिकारियों से पूछें जो वापस चले गए हैं और बहुत अच्छा कर रहे हैं.

अग्निपथ की परीक्षा नियमित सेना भर्ती के समान

अग्निपथ में भर्ती प्रक्रिया अलग नहीं होगा.सभी प्रक्रिया समान होगी. उन्हें समान सुविधाएं, पुरस्कार, बीमा मिलेगा. सभी मानदंड समान रहने वाले हैं  इससे रेजिमेंटल स्पिरिट को भी नुकसान नहीं होगा. क्योंकि  जब आप उन्हें अपनी इकाई में भर्ती करते हैं, तो आप उन्हें प्रशिक्षित करते हैं. यदि आपने तीन से चार महीने के भीतर उनमें रेजिमेंटल स्पिरिट नहीं जगाया है, तो आप एक असफल कमांडिंग ऑफिसर हैं. क्या वे कह सकते हैं कि वे अपनी इकाई के सदस्यों को प्रेरित करने में विफल रहे?

रोजगार देने का माध्यम नहीं है सेना

सेना रोजगार देने का माध्यम नहीं है. पूरे दिल से देश की सेवा करने के लिए, आप शपथ लेते हैं कि आप मरने पर भी नहीं झुकने वाले हैं. आप स्वेच्छा से वह शपथ लेते हैं. सेना की नौकरी के बाद हर राज्य में पूर्व सैनिकों के लिए एक कोटा रखा गया है. कुछ राज्य इसे चतुर्थ और तृतीय श्रेणी में रख रहे हैं. सशस्त्र बल इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. पालने की कोई बात नहीं है. जब तक आप योजना में शामिल नहीं होंगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा.

First Published : 18 Jun 2022, 07:31:34 PM

For all the Latest Specials News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.