Explainer: 'क्या ये छोटा-सा बदलाव बड़ा मैसेज दे रहा है, राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान से ऊपर रखने की कोशिश?

Vande Mataram 6 stanzas mandatory: वंदे मातरम् (राष्ट्रगीत) बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में लिखा था. इसमें कुल 6 छंद हैं. राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम में लोकप्रिय हुआ था. 1937 में कांग्रेस ने इसके सिर्फ पहले 2 छंद रखे, उस समय कहा गया कि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर बाकी 4 छंद हटाए जा रहे हैं.

Vande Mataram 6 stanzas mandatory: वंदे मातरम् (राष्ट्रगीत) बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में लिखा था. इसमें कुल 6 छंद हैं. राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम में लोकप्रिय हुआ था. 1937 में कांग्रेस ने इसके सिर्फ पहले 2 छंद रखे, उस समय कहा गया कि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर बाकी 4 छंद हटाए जा रहे हैं.

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Amit Kasana
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Vande Mataram 6 stanzas mandatory: केंद्र सरकार ने 'वंदे मातरम्' के पूरे 6 छंदों वाले संस्करण को सरकारी और आधिकारिक समारोहों में अनिवार्य कर दिया है. यह संस्करण कुल 3 मिनट 10 सेकंड लंबा है, जिसमें पहले सिर्फ 2 छंद ही इस्तेमाल होते थे. जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय ने इस बारे में बीती 28 जनवरी को आदेश जारी किए थे जो 11 फरवरी को सार्वजनिक किए गए हैं. 

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नए आदेशों के मुताबिक तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति, राज्यपाल के आगमन-प्रस्थान, उनके भाषणों से पहले-बाद, सिविल इन्वेस्टिचर (जैसे पद्म अवॉर्ड) और अन्य महत्वपूर्ण मौकों पर यह राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान से पहले गाना या बजाना जरूरी होगा.

खड़े होकर इनके प्रति सम्मान दिखाना अनिवार्य होगा

आदेश में ये स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी कार्यक्रम में 'वंदे मातरम्' और 'जन गण मन' (राष्ट्रगान) दोनों होंगे तो राष्ट्रगीत पहले बजेगा. इतना ही नहीं इनके गाने या बजाने के दौरान सभी लोगों को खड़े होकर इनके प्रति सम्मान दिखाना अनिवार्य होगा. देश के दौरान सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान (बीच में) में ये बजते हैं तो खड़े होने की छूट होगी. वहीं, स्कूलों में इसे बढ़ावा देने और सामूहिक गायन को प्रोत्साहन दिया जाएगा.

नए नियमों के पीछे गहरा सांस्कृतिक और राजनीतिक मैसेज छिपा

बताया जा रहा है कि यह कदम स्वतंत्रता संग्राम के मूल गीत को पूरी शक्ति के साथ वापस लाने और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का प्रयास है. केंद्र सरकार ये छोटा-सा बदलाव सिर्फ प्रोटोकॉल का मामला नहीं लगता है इसमें एक गहरा सांस्कृतिक और राजनीतिक मैसेज छिपा हुआ लगता है. क्यों राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान से ऊपर रखा जा रहा है या ये सिर्फ प्रतीकात्मक है? आइए इसे समझते हैं...

पहले आप राष्ट्रगीत का बैकग्राउंड क्या है यह जानिए?

वंदे मातरम् (राष्ट्रगीत) बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में लिखा था. इसमें कुल 6 छंद हैं. राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम में लोकप्रिय हुआ था. 1937 में कांग्रेस ने इसके सिर्फ पहले 2 छंद रखे, उस समय कहा गया कि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर बाकी 4 छंद हटाए जा रहे हैं. 1950 में संविधान सभा ने पहले 2 छंदों को ही राष्ट्रगीत का दर्जा दिया. वहीं, जन गण मन (राष्ट्रगान) रवींद्रनाथ टैगोर ने 1950 में लिखा था. दोनों को बराबर सम्मान मिलता था लेकिन अभी तक प्रोटोकॉल में कोई सख्त क्रम नहीं था.

नया आदेश क्या कहता है, अब क्या बदलेगा?

जानकारी के अनुसार अब सरकारी या सार्वजनिक समारोहों में राष्ट्रगीत के पूरे 6 छंद जो कुल 3 मिनट 10 सेकंड के हैं गाने या बाने अनिवार्य होंगे. आदेश के अनुसार जहां दोनों होंगे वहां वंदे मातरम् पहले होगा. दोनों के दौरान खड़े होना जरूरी होगा. स्कूल, सरकारी कार्यक्रम, राष्ट्रपति या गवर्नर के इवेंट्स आदि में भी ये नियम लागू होंगे. संविधान के जानकारों की मानें तो क्रम बदलने से पहले अब तक इनके बजाने या गाने का कोई फिक्स क्रम नहीं था. अब स्पष्ट रूप से राष्ट्रगीत पहले आ रहा है. ये एक तरह से कह रहा है 'मातृभूमि की स्तुति पहले, फिर राष्ट्र की एकता का गान होगा'. कुछ लोगों का ये भी मानना है कि दोनों को बराबर सम्मान दिया जा रहा है. राष्ट्रगान के सम्मान में कोई बदलाव नहीं है.

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