Explainer: अमेरिका-भारत ट्रेड डील, 'मेक इन इंडिया' को मिला जोरदार बूस्ट या ट्रंप का स्मार्ट मूव; क्या है पूरी कहानी?

US India trade deal 2026: 2025 में ट्रंप ने भारत पर 25% 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाया जिसका मतलब था कि अगर 'तुम्हारा टैरिफ ज्यादा, तो हमारा भी'. फिर अगस्त 2025 में अमेरिका  ने भारत को एक और झटका दिया और एडिशनल 25% 'पनिशेटिव टैरिफ' ठोक दिया.

US India trade deal 2026: 2025 में ट्रंप ने भारत पर 25% 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाया जिसका मतलब था कि अगर 'तुम्हारा टैरिफ ज्यादा, तो हमारा भी'. फिर अगस्त 2025 में अमेरिका  ने भारत को एक और झटका दिया और एडिशनल 25% 'पनिशेटिव टैरिफ' ठोक दिया.

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Amit Kasana
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US India trade deal 2026, Trump cuts tariffs on India, India US tariff reduction 18%, Trump Modi trade agreement, India stops Russian oil purchases

डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

Trump reduces India tariffs from 50% to 18%: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी 2026 को  एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने भारत से आने वाले सामानों पर लग ने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है. ये खबर भारत के बाजारों में खुशी की लहर लेकर आई है. इससे शेयर बाजार उछल पड़े और रुपया मजबूत होने की उम्मीद जगी है. लेकिन बता दें कि अमेरिका ने ये फैसला अचानक नहीं आया है. दोनों देशों के बीच ये टैरिफ पर ये महीनों की खींचतान का नतीजा है. आइए आपको इस मुद्दे को हर एंगल से समझते हैं कि ये क्या मसला है, भारत को इससे क्या फायदा होगा, अमेरिका ने ऐसा क्यों किया है और इसके पीछे की बड़ी तस्वीर क्या है?

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अमेरिकी कंपनियों को परेशान कर रही थी ये बात 

अमेरिका और भारत के ट्रेड रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं. ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में (2025 से) 'अमेरिका फर्स्ट' पॉलिसी के तहत दुनिया भर पर टैरिफ बढ़ा रहे थे. भारत के मामले में अमेरिका को लगता था कि भारत का ट्रेड सरप्लस यानी भारत अमेरिका को ज्यादा बेचता है, लेकिन खरीदता कम है जो सही नहीं है. इसके अलावा भारत की कुछ पॉलिसी जैसे हाई टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स जैसे रेगुलेशन्स अमेरिकी कंपनियों को परेशान कर रही थीं. 

भारतीय एक्सपोर्टर्स को हुआ था बड़ा नुकसान, गिरा था भारतीय रुपया  

2025 में ट्रंप ने भारत पर 25% 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाया जिसका मतलब था कि अगर 'तुम्हारा टैरिफ ज्यादा, तो हमारा भी'. फिर अगस्त 2025 में अमेरिका  ने भारत को एक और झटका दिया और एडिशनल 25% 'पनिशेटिव टैरिफ' ठोक दिया. जिसके पीछे का तर्क ये था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है जो उसे पसंद नहीं है जबकि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध हैं. बता दें इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ा नुकसान हुआ और बाजार में गिरावट आई. वहीं, इससे विदेशी निवेशक भी भारत से दूरी बनाने लगे. जिससे रुपया कमजोर पड़ गया. 

अब क्या हुआ है? डील की हर छोटी-बड़ी डिटेल्स

जानकारी के अनुसार ट्रंप ने 2 फरवरी को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट की. इस पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की करने की जानकारी दी और लिखा कि दोनों देशों ने एक डील की है. उनका कहना था कि ये डील दोनों देशों की एक-दूसरे के प्रति'फ्रेंडशिप और रिस्पेक्ट' को दर्शाता है. फिर आगे उन्होंने बताया था कि अमेरिका ने भारत पर लगे टैरिफ को 18% कर दिया है और पनिशेटिव टैरिफ 25% को पूरी तरह हटा दिया है. इसके बाद मोदी ने X पर पोस्ट कर अमेरिका के इस फैसले का स्वागत किया  और कहा कि 'मेड इन इंडिया' प्रोडक्ट्स अब अमेरिका में सस्ते होंगे और दोनों देशों की दोस्ती और मजबूत होगी.

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डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी (AI IMAGE)

इस पूरी डील से भारत को क्या फायदा होगा?

जानकारों की मानें तो ये डील भारत के लिए जैसे कोई जैकपॉट है. इससे सबसे बड़ा फायदा एक्सपोर्ट्स को होगा. दरअसल, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और नए आदेश के बाद अब भारतीय सामान वहां 18% टैरिफ पर जाएंगे. इससे 'मेक इन इंडिया' को बूस्ट मिलेगा फार्मर्स, छोटे बिजनेस (MSME), एंटरप्रेन्योर्स और स्किल्ड वर्कर्स को नए मौके मिलेंगे. इस डील के बाद ही बाजार पर इसका असर दिशा. शेयर बाजारर में सोमवार को तूफानी तेजी देखने को मिली. सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स 2500 और निफ्टी 700 अंक तक उछला. अनुमान है कि इससे निवेशकों को 20 लाख करोड़ का फायदा हुआ है. 

अमेरिका ने ऐसा क्यों किया है, इस पूरी डील से उसे क्या फायदा होगा?

ट्रंप का मेन मोटिव रूस को कमजोर करना है. रूस यूक्रेन युद्ध के बीच भारत जैसे देशों को तेल बेचकर पैसे कमा रहा है. दरअसल, अमेरिका चाहता है कि ये रुक जाए. ट्रंप भारत पर महीनों से प्रेशर डाला टैरिफ बढ़ाकर भारत को तेल न खरीदने पर मजबूर करने के प्रयास में लगे थे. अब इस नई डील के बाद भारत के वादे से अमेरिका को बड़ा फायदा होगा. इससे अमेरिका में 500 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट होगा जो वहां जॉब्स बढ़ाएगा. इसके अलावा ट्रेड डेफिसिट कम होगा, ट्रंप इसे 'बाय अमेरिकन' कैंपेन का हिस्सा मानते हैं है. इस डील के बाद भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा. इसकी बजाय अमेरिका और शायद वेनेजुएला से तेल लिया जाएगा. भारत अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को जीरो करेगा यानी अमेरिकी सामान भारत में आसानी से आएंगे.

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