EPF सैलरी लिमिट पर सुप्रीम कोर्ट की 4 महीने की मोहलत: कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

EPF Explainer: देश के लाखों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला क्यों अहम है. आइए विस्तार से जानते हैं.

EPF Explainer: देश के लाखों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला क्यों अहम है. आइए विस्तार से जानते हैं.

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Dheeraj Sharma
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Supreme Court On EPFO

EPF Explainer: देश के लाखों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने EPF की सैलरी लिमिट (वेतन सीमा) को लेकर केंद्र सरकार और EPFO को 4 महीने की डेडलाइन दी है. इस अवधि में यह तय किया जाना है कि EPF और EPS (पेंशन) के लिए वेतन सीमा बढ़ाई जाए या नहीं. यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि EPFO की सैलरी लिमिट पिछले 11 साल से जस की तस बनी हुई है.

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लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर क्यों?

वर्तमान में EPF की सैलरी लिमिट 15,000 रुपए प्रति महीने है. यानी इससे ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को न तो अनिवार्य EPF कवरेज मिलता है और न ही पूरी सैलरी पर पेंशन का लाभ. अगर यह सीमा बढ़ती है, तो बड़ी संख्या में मिडिल क्लास और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी बेहतर PF और पेंशन सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे.

नई EPF सैलरी लिमिट कितनी हो सकती है?

हालांकि अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा तय नहीं हुआ है, लेकिन कर्मचारी संगठनों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई सैलरी लिमिट 21,000 या 25,000 रुपए तक बढ़ाई जा सकती है. कुछ मांगें इसे 30,000 रुपए तक ले जाने की भी हैं, ताकि महंगाई और मौजूदा वेतन संरचना के साथ तालमेल बैठाया जा सके.

आपकी सैलरी और PF कटौती पर क्या असर पड़ेगा?

अगर सैलरी लिमिट बढ़ती है तो...

- कर्मचारियों का PF योगदान बढ़ सकता है

- नियोक्ता (Employer) को भी ज्यादा योगदान देना होगा

- EPS के तहत पेंशन योग्य वेतन बढ़ेगा

- रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि ज्यादा हो सकती है

हालांकि, हाथ में मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है क्योंकि PF कटौती बढ़ेगी.

EPFO की सैलरी लिमिट 11 साल से क्यों अटकी है?

EPFO की वेतन सीमा का आखिरी संशोधन 2014 में हुआ था, जब इसे 6,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए किया गया था. इसके बाद...

- नियोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ

- सरकार पर सब्सिडी का दबाव

- पेंशन फंड की दीर्घकालिक स्थिरता जैसे कारणों से इसे बढ़ाने पर फैसला टलता रहा. अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इस पर निर्णय जरूरी हो गया है.

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EPF FAQs 

Q. EPF क्या है और इसका फायदा किसे मिलता है?

EPF एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं. इसका फायदा संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलता है.

Q. EPFO की मौजूदा वेतन सीमा कितनी है?

फिलहाल EPF और EPS के लिए वेतन सीमा 15,000 प्रति माह है.

Q. सुप्रीम कोर्ट ने EPF सैलरी लिमिट को लेकर क्या आदेश दिया है?

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और EPFO को 4 महीने के भीतर सैलरी लिमिट पर फैसला लेने की समयसीमा दी है.

Q. EPF की सैलरी लिमिट बढ़ने से कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?

ज्यादा PF जमा, बेहतर पेंशन, और रिटायरमेंट के समय बड़ी राशि का लाभ मिलेगा.

Q. EPF पैसा कब और कैसे निकाला जा सकता है?

नौकरी छोड़ने, रिटायरमेंट, मेडिकल जरूरत, घर खरीदने या बेरोजगारी की स्थिति में आंशिक या पूरा PF निकाला जा सकता है. 

Q. क्या 15,000 से ज्यादा सैलरी वालों के लिए EPF अनिवार्य है?

नहीं, 15,000 से ज्यादा वेतन वालों के लिए EPF अनिवार्य नहीं है, लेकिन नियोक्ता की सहमति से वे इसमें शामिल हो सकते हैं.

कुल मिलाकर EPF सैलरी लिमिट पर आने वाला फैसला आने वाले महीनों में कर्मचारियों की रिटायरमेंट प्लानिंग की दिशा तय कर सकता है। अब सभी की नजरें सरकार और EPFO के अगले कदम पर टिकी हैं.

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