Explainer: रूस-यूक्रेन युद्ध के 4 साल पूरे, EU के नए प्रतिबंधों पर हंगरी का 'वीटो बम'

Russia Ukraine war 4th anniversary: रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ दो देशों का नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा है. EU को जल्द ही इस गतिरोध को सुलझाना होगा वरना रूस की रणनीति 'फूट डालो और राज करो' कामयाब हो सकती है.

Russia Ukraine war 4th anniversary: रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ दो देशों का नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा है. EU को जल्द ही इस गतिरोध को सुलझाना होगा वरना रूस की रणनीति 'फूट डालो और राज करो' कामयाब हो सकती है.

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Amit Kasana
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रूस-यूक्रेन युद्ध की प्रतिकात्मक फोटो

Russia Ukraine war 4th anniversary: रूस-यूक्रेन युद्ध अभी जारी है. इसकी शुरुआत 24 फरवरी 2022 को हुई थी. इस दिन रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू किया था. 24 फरवरी 2026 को इस संघर्ष के चार साल पूरे हो गए हैं. ये यूरोप के द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा और खूनी युद्ध बन चुका है. 

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बता दें अभी तक इस युद्ध में लाखों सैनिक और नागरिक मारे जा चुके हैं, करोड़ों लोग विस्थापित हुए हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ा है. लेकिन इस वर्षगांठ पर यूरोपीय यूनियन (EU) के सदस्य देश रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश में जुटे हैं. हालांकि रास्ते में बड़ी बाधाएं आ रही हैं. आइए समझते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अभी क्या हो रहा है और दोनों देशों के लिए अभी  इस युद्ध का मतलब क्या है?

क्यों शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध और अभी तक इसमें क्या हो रहा है?

पूर्व सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यह युद्ध रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वाकांक्षाओं से उपजा जिन्होंने यूक्रेन को 'नाजी' प्रभाव से मुक्त करने का दावा किया लेकिन असल में यह रूस की क्षेत्रीय विस्तारवादी नीति का हिस्सा माना जाता है. शुरू में रूस ने कीव पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन यूक्रेन की सेना और पश्चिमी सहायता ने इसे रोका. 

आइए आपको समझाते हैं कि बीते चार सालों में युद्ध में क्या-क्या हुआ? 
 
- 2022-2023: रूस ने पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों पर कब्जा किया लेकिन यूक्रेन ने काउंटर-अटैक से कुछ इलाके वापस लिए.

- 2024-2025: ड्रोन हमले, मिसाइल अटैक और आर्थिक दबाव बढ़े. अनुमानित 18 लाख सैनिक हताहत हुए हैं.

- 2026: युद्ध अब स्थिर मोर्चे पर है लेकिन रूस की अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों का असर दिख रहा है, जबकि यूक्रेन को पुनर्निर्माण की चुनौती का सामना है.

रूस को कमजोर करने का हो रहा प्रयास

जानकारी के अनुसार  EU और उसके सहयोगी देशों ने यूक्रेन को वित्तीय, सैन्य और मानवीय सहायता दी है जो अब तक की सबसे बड़ी है. लेकिन रूस को कमजोर करने के लिए प्रतिबंध सबसे बड़ा हथियार बने हैं.

EU ने की रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी, अब तक ये किया 

EU अब तक रूस पर 19 पैकेज के प्रतिबंध लगा चुका है जिसमें ऊर्जा आयात पर रोक, बैंकिंग प्रतिबंध और व्यक्तिगत संपत्तियों की जब्ती शामिल है. इनसे रूस की अर्थव्यवस्था 10-15% सिकुड़ी है. अब 20वें पैकेज पर विचार हो रहा है जो मुख्य रूप से इन बिन्दुओं पर है.

- रूसी तेल टैंकरों पर सेवाओं की पूर्ण रोक.

- अतिरिक्त व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध, जैसे मानवाधिकार उल्लंघन करने वाले रूसी अधिकारी.

- यूक्रेन को 90 बिलियन यूरो (करीब 106 बिलियन डॉलर) का आपातकालीन लोन.


हंगरी का वीटो है सबसे बड़ा रोड़ा

EU के फैसलों के लिए सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति जरूरी है. यहां हंगरी ने डबल वीटो लगा दिया जिसका कारण एक ऊर्जा विवाद बताया जा रहा है. आइए आपको इसकी डिटेल बताते हैं.

- यूक्रेन ने जनवरी 2027 से हंगरी और स्लोवाकिया को रूसी तेल की सप्लाई रोकी, जो पुरानी 'द्रुझबा' पाइपलाइन से होती थी.

- हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने इसे 'ब्लैकमेल' बताया और जवाब में वीटो का इस्तेमाल किया. उन्होंने यूक्रेन से डीजल निर्यात भी रोका.

- स्लोवाकिया भी हंगरी के साथ है, जिससे EU की एकता पर सवाल उठ रहे हैं.

EU के नए कदम का रूस और यूक्रेन पर क्या होगा असर

ईयू के नए कदम का यूकेन पर ये असर होगा कि सहायता रुकने से देश के पुनर्निर्माण और सैन्य मदद प्रभावित होगी. ताजा घटनाक्रम में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका समेत सहयोगियों से अपील की है कि वे 'हमारे साथ रहें'. वहीं, रूस पर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहेंगे, लेकिन नए न लगने से रूस को राहत मिल सकती है. हालांकि, उसका वैश्विक अलगाव बढ़ रहा है.

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